Love Poetry (page 177)

हुब्ब-ए-क़ौमी

चकबस्त ब्रिज नारायण

हमारा वतन दिल से प्यारा वतन

चकबस्त ब्रिज नारायण

आसिफ़ुद्दौला का इमामबाड़ा लखनऊ

चकबस्त ब्रिज नारायण

उन्हें ये फ़िक्र है हर दम नई तर्ज़-ए-जफ़ा क्या है

चकबस्त ब्रिज नारायण

नए झगड़े निराली काविशें ईजाद करते हैं

चकबस्त ब्रिज नारायण

न कोई दोस्त दुश्मन हो शरीक-ए-दर्द-ओ-ग़म मेरा

चकबस्त ब्रिज नारायण

मिरी बे-ख़ुदी है वो बे-ख़ुदी कहीं ख़ुदी का वहम-ओ-गुमाँ नहीं

चकबस्त ब्रिज नारायण

कुछ ऐसा पास-ए-ग़ैरत उठ गया इस अहद-ए-पुर-फ़न में

चकबस्त ब्रिज नारायण

हम सोचते हैं रात में तारों को देख कर

चकबस्त ब्रिज नारायण

फ़ना का होश आना ज़िंदगी का दर्द-ए-सर जाना

चकबस्त ब्रिज नारायण

दिल किए तस्ख़ीर बख़्शा फ़ैज़-ए-रूहानी मुझे

चकबस्त ब्रिज नारायण

दर्द-ए-दिल पास-ए-वफ़ा जज़्बा-ए-ईमाँ होना

चकबस्त ब्रिज नारायण

दर्द-ए-दिल पास-ए-वफ़ा जज़्बा-ए-ईमाँ होना

चकबस्त ब्रिज नारायण

अगर दर्द-ए-मोहब्बत से न इंसाँ आश्ना होता

चकबस्त ब्रिज नारायण

शिकन-अंदर-शिकन याद आ गया है

बुशरा ज़ैदी

सवाद-ए-शाम से डरता हुआ नज़र आया

बुशरा ज़ैदी

अब के बरस भी महका महका ख़्वाब दरीचा लगता है

बुशरा ज़ैदी

सर-ए-दश्त दिल जो सराब था कोई ख़्वाब था

बुशरा हाश्मी

दिल के ज़ख़्मों की चुभन दीदा-ए-तर से पूछो

बुशरा हाश्मी

आँखों को अब निगाह की आदत नहीं रही

बुशरा हाश्मी

जब राख से उट्ठेगा कभी इश्क़ का शोला

बुशरा एजाज़

उन्हें ढूँडो

बुशरा एजाज़

मेरे ख़ामोश ख़ुदा

बुशरा एजाज़

मोहब्बत में कोई सदमा उठाना चाहिए था

बुशरा एजाज़

मंज़रों के दरमियाँ मंज़र बनाना चाहिए

बुशरा एजाज़

दिल में है तलब और दुआ और तरह की

बुशरा एजाज़

ये अदा आप में सरकार कहाँ थी पहले

बुध प्रकाश गुप्ता जौहर देवबंद

आठ पहर है ये ही ग़म

बुध प्रकाश गुप्ता जौहर देवबंद

नफ़रत से बचा कर तू उल्फ़त को सजा दिल में

बबल्स होरा सबा

सोज़-ए-फ़िराक़ दिल में छुपाए हुए हैं हम

बबल्स होरा सबा