Love Poetry (page 179)

कौन समझे इश्क़ की दुश्वारियाँ

बिस्मिल सईदी

कब से उलझ रहे हैं दम-ए-वापसीं से हम

बिस्मिल सईदी

इश्क़ जो ना-गहाँ नहीं होता

बिस्मिल सईदी

फ़राहम जिस क़दर इशरत के सामाँ होते जाते हैं

बिस्मिल सईदी

बैठा नहीं हूँ साया-ए-दीवार देख कर

बिस्मिल सईदी

अब इश्क़ रहा न वो जुनूँ है

बिस्मिल सईदी

वो अक्स बन के मिरी चश्म-ए-तर में रहता है

बिस्मिल साबरी

वो अक्स बन के मिरी चश्म-ए-तर में रहता है

बिस्मिल साबरी

हैराँ हूँ कि अब लाऊँ कहाँ से मैं ज़बाँ और

बिस्मिल साबरी

ये ज़िंदगी भी कोई ज़िंदगी हुई 'बिस्मिल'

बिस्मिल अज़ीमाबादी

रहरव-ए-राह-ए-मोहब्बत रह न जाना राह में

बिस्मिल अज़ीमाबादी

मजबूरियों को अपनी कहें क्या किसी से हम

बिस्मिल अज़ीमाबादी

दास्ताँ पूरी न होने पाई

बिस्मिल अज़ीमाबादी

'बिस्मिल' बुतों का इश्क़ मुबारक तुम्हें मगर

बिस्मिल अज़ीमाबादी

ये बुत फिर अब के बहुत सर उठा के बैठे हैं

बिस्मिल अज़ीमाबादी

तंग आ गए हैं क्या करें इस ज़िंदगी से हम

बिस्मिल अज़ीमाबादी

सारी उम्मीद रही जाती है

बिस्मिल अज़ीमाबादी

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

बिस्मिल अज़ीमाबादी

निगाह-ए-क़हर होगी या मोहब्बत की नज़र होगी

बिस्मिल अज़ीमाबादी

न अपने ज़ब्त को रुस्वा करो सता के मुझे

बिस्मिल अज़ीमाबादी

मेरी दुआ कि ग़ैर पे उन की नज़र न हो

बिस्मिल अज़ीमाबादी

ख़िज़ाँ के जाने से हो या बहार आने से

बिस्मिल अज़ीमाबादी

ख़िज़ाँ जब तक चली जाती नहीं है

बिस्मिल अज़ीमाबादी

चमन को लग गई किस की नज़र ख़ुदा जाने

बिस्मिल अज़ीमाबादी

अब रहा क्या है जो अब आए हैं आने वाले

बिस्मिल अज़ीमाबादी

ये कैसी आग अभी ऐ शम्अ तेरे दिल में बाक़ी है

बिस्मिल इलाहाबादी

याद आता है समाँ मुझ को ख़ुद-आराई का

बिस्मिल इलाहाबादी

साज़-ए-हस्ती का अजब जोश नज़र आता है

बिस्मिल इलाहाबादी

क़ाबिल-ए-शरह मिरा हाल-ए-दिल-ए-ज़ार न था

बिस्मिल इलाहाबादी

न रहे तुम जो हमारे तो सहारा न रहा

बिस्मिल इलाहाबादी