Love Poetry (page 223)

ख़ला-ए-ज़ेहन के गुम्बद में गूँजता हूँ मैं

आज़ाद गुलाटी

कर्ब हरे मौसम का तब तक सहना पड़ता है

आज़ाद गुलाटी

कभी मिली जो तिरे दर्द की नवा मुझ को

आज़ाद गुलाटी

जो ग़म में जलते रहे उम्र-भर दिया बन कर

आज़ाद गुलाटी

हमारी आँख में ठहरा हुआ समुंदर था

आज़ाद गुलाटी

गो मिरा साथ मिरी अपनी नज़र ने न दिया

आज़ाद गुलाटी

दिन में इस तरह मिरे दिल में समाया सूरज

आज़ाद गुलाटी

किसे फ़ुर्सत कि फ़र्ज़-ए-ख़िदमत-ए-उल्फ़त बजा लाए

आज़ाद अंसारी

हम को न मिल सका तो फ़क़त इक सुकून-ए-दिल

आज़ाद अंसारी

दीदार की तलब के तरीक़ों से बे-ख़बर

आज़ाद अंसारी

अगर कार-ए-उल्फ़त को मुश्किल समझ लूँ

आज़ाद अंसारी

सितम-दोस्त फ़िक्र-ए-अदावत कहाँ तक

आज़ाद अंसारी

न पूछो कौन हैं क्यूँ राह में नाचार बैठे हैं

आज़ाद अंसारी

हक़ बना बातिल बना नाक़िस बना कामिल बना

आज़ाद अंसारी

रूह ज़ख़्मी है जिस्म घायल है

आयुष चराग़

इबारतें चमक रही हैं दिल में तेरे प्यार की

आयुष चराग़

दिल ने खुलने की राह ले ली है

आयुष चराग़

ये किस मक़ाम पे पहुँचा है कारवान-ए-वफ़ा

अय्यूब साबिर

मता-ए-फ़िक्र-ओ-नज़र रहा हूँ

अय्यूब साबिर

रहगुज़ारों में रौशनी के लिए

अय्यूब रूमानी

दिल में कुछ दर्द सिवा है यारो

अय्यूब रूमानी

मोहब्बत का एक साल

अय्यूब ख़ावर

कुछ और हो भी तो राएगाँ है

अय्यूब ख़ावर

ज़ब्त करना न कभी ज़ब्त में वहशत करना

अय्यूब ख़ावर

उश्शाक़ बहुत हैं तिरे बीमार बहुत हैं

अय्यूब ख़ावर

तिलिस्म-ए-इस्म-ए-मोहब्बत है दरपय-ए-दर-ए-दिल

अय्यूब ख़ावर

सोचों में लहू उछालते हैं

अय्यूब ख़ावर

सात सुरों का बहता दरिया तेरे नाम

अय्यूब ख़ावर

न कोई दिन न कोई रात इंतिज़ार की है

अय्यूब ख़ावर

न कोई दिन न कोई रात इंतिज़ार की है

अय्यूब ख़ावर