Love Poetry (page 245)

गुलशन गुलशन शो'ला-ए-गुल की ज़ुल्फ़-ए-सबा की बात चली

असग़र सलीम

ग़ुबार सा है सर-ए-शाख़-सार कहते हैं

असग़र सलीम

रौनक़ तिरे कूचे की बढ़ाने चले आए

असग़र राही

इक शख़्स अपने हाथ की तहरीर दे गया

असग़र राही

अपने घर में मिरी तस्वीर सजाने वाले

असग़र राही

ज़िंदगी मौत का आईना

असग़र नदीम सय्यद

तारीख़ एक ख़ामोश ज़माना

असग़र नदीम सय्यद

शहर-बदर

असग़र नदीम सय्यद

सफ़र से लौट आने वाली हवा

असग़र नदीम सय्यद

मुझे एक दिन चाहिए

असग़र नदीम सय्यद

मोहब्बत की नज़्म

असग़र नदीम सय्यद

मेरे दिल में जंगल है

असग़र नदीम सय्यद

जब हम दोनों जुदा हुए थे

असग़र नदीम सय्यद

एक आँच की कमी

असग़र नदीम सय्यद

दिल जारी है

असग़र नदीम सय्यद

धूप-भरी अजरक

असग़र नदीम सय्यद

दम तोड़ती है शाम की नीली हवा

असग़र नदीम सय्यद

अपनी रात लय जाओ

असग़र नदीम सय्यद

ऐ ख़ामोशी

असग़र नदीम सय्यद

अभी कुछ दिन लगेंगे

असग़र नदीम सय्यद

आज़ादों का गीत

असग़र नदीम सय्यद

साग़र नहीं कि झूम के उट्ठे उठा लिया

असग़र मेहदी होश

खो गई जा के नज़र यूँ रुख़-ए-रौशन के क़रीब

असग़र मेहदी होश

जाने किस किस का गला कटता पस-ए-पर्दा-ए-इश्क़

असग़र मेहदी होश

ना-गुज़ीर

असग़र मेहदी होश

हुसैन

असग़र मेहदी होश

प्यासा रहा मैं बाला-क़दी के फ़रेब में

असग़र मेहदी होश

फूल पत्थर की चटानों पे खिलाएँ हम भी

असग़र मेहदी होश

मोहब्बत कर के शर्मिंदा नहीं हूँ

असग़र मेहदी होश

मेरा बचपन ही मुझे याद दिलाने आए

असग़र मेहदी होश