Love Poetry (page 244)

तिरे पहलू में तिरे दिल के क़रीं रहना है

अशफ़ाक़ हुसैन

कहा किस ने मुसलसल काम करने के लिए है

अशफ़ाक़ हुसैन

हंगाम-ए-शब-ओ-रोज़ में उलझा हुआ क्यूँ हूँ

अशफ़ाक़ हुसैन

गिरती है तो गिर जाए ये दीवार-ए-सुकूँ भी

अशफ़ाक़ हुसैन

अपनी ख़ुशी से मुझे तेरी ख़ुशी थी अज़ीज़

अशफ़ाक़ आमिर

इक पल में क्या कुछ बदल गया जब बे-ख़बरों को ख़बर हुई

अशफ़ाक़ आमिर

एक नया वाक़िआ इश्क़ में क्या हो गया

अशफ़ाक़ आमिर

कैनवस पर है ये किस का पैकर-ए-हर्फ़-ओ-सदा

अशअर नजमी

यहाँ तो हर घड़ी कोह-ए-निदा की ज़द में रहते हैं

अशअर नजमी

इंकिशाफ़-ए-ज़ात के आगे धुआँ है और बस

अशअर नजमी

अंधेरे में तजस्सुस का तक़ाज़ा छोड़ जाना है

अशअर नजमी

ज़िंदगी करना वो मुश्किल फ़न है 'अशहर' हाशमी

अशहर हाशमी

वहीं के पत्थरों से पूछ मेरा हाल-ए-ज़िंदगी

अशहर हाशमी

शोर कैसा है मिरे दिल के ख़राबे से उठा

अशहर हाशमी

शहर में छाई हुई दीवार-ता-दीवार थी

अशहर हाशमी

क्या क़द्र-ए-अना होगी जबीं जान रही है

अशहर हाशमी

अजनबियत थी मगर ख़ामोश इस्तिफ़्सार पर

अशहर हाशमी

हर लम्हा चाँद चाँद निखरना पड़ा मुझे

अाशा प्रभात

दैर-ओ-हरम भी आए कई इस सफ़र के बीच

अाशा प्रभात

ज़िंदगी से समझौता आज हो गया कैसे

असग़र वेलोरी

मुझ को ग़म का न कभी दर्द का एहसास रहा

असग़र वेलोरी

ऐ चारागरो पास तुम्हारे न मिलेगी

असग़र वेलोरी

सुनो कुछ दीदा-ए-नम बोलते हैं

असग़र वेलोरी

कोई छोटा यहाँ कोई बड़ा है

असग़र वेलोरी

किसी की चाह में ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है

असग़र वेलोरी

कहने आए थे कुछ कहा ही नहीं

असग़र वेलोरी

हो गई अपनों की ज़ाहिर दुश्मनी अच्छा हुआ

असग़र वेलोरी

''ख़ुश्क पत्ता है तो हवा से डर''

असग़र शमीम

इस एक बात से गुलचीं का दिल धड़कता है

असग़र सलीम

गुलशन गुलशन शोला-ए-गुल की ज़ुल्फ़-ए-सबा की बात चली

असग़र सलीम