Love Poetry (page 248)

इश्क़ है इक कैफ़-ए-पिन्हानी मगर रंजूर है

असग़र गोंडवी

हुस्न को वुसअतें जो दीं इश्क़ को हौसला दिया

असग़र गोंडवी

है दिल-ए-नाकाम-ए-आशिक़ में तुम्हारी याद भी

असग़र गोंडवी

गुम कर दिया है दीद ने यूँ सर-ब-सर मुझे

असग़र गोंडवी

गर्म-ए-तलाश-ओ-जुस्तुजू अब है तिरी नज़र कहाँ

असग़र गोंडवी

एक ऐसी भी तजल्ली आज मय-ख़ाने में है

असग़र गोंडवी

इक आलम-ए-हैरत है फ़ना है न बक़ा है

असग़र गोंडवी

असरार-ए-इश्क़ है दिल-ए-मुज़्तर लिए हुए

असग़र गोंडवी

अक्स किस चीज़ का आईना-ए-हैरत में नहीं

असग़र गोंडवी

आशोब-ए-हुस्न की भी कोई दास्ताँ रहे

असग़र गोंडवी

आलाम-ए-रोज़गार को आसाँ बना दिया

असग़र गोंडवी

सीम-तन गुल-रुख़ों की बस्ती है

असग़र आबिद

किस तरह आए तिरी बज़्म-ए-तरब में आइना

असीर लखनवी

हुस्न-ए-बेपर्दा की गर्मी से कलेजा पक्का

असीर लखनवी

बाग़ में फूल खिले मौसम-ए-सौदा आया

असीर लखनवी

ये हुस्न-ए-दिल-फ़रेब ये आलम शबाब का

असर सहबाई

तेरे शबाब ने किया मुझ को जुनूँ से आश्ना

असर सहबाई

जिस हुस्न की है चश्म-ए-तमन्ना को जुस्तुजू

असर सहबाई

जहाँ पे छाया सहाब-ए-मस्ती बरस रही है शराब-ए-मस्ती

असर सहबाई

रुमूज़-ए-मोहब्बत

असर सहबाई

ज़ुल्मत-ए-दश्त-ए-अदम में भी अगर जाऊँगा

असर सहबाई

तुम्हारी याद में दुनिया को हूँ भुलाए हुए

असर सहबाई

तुम्हारी फ़ुर्क़त में मेरी आँखों से ख़ूँ के आँसू टपक रहे हैं

असर सहबाई

मिरी हर साँस को सब नग़्मा-ए-महफ़िल समझते हैं

असर सहबाई

लुत्फ़ गुनाह में मिला और न मज़ा सवाब में

असर सहबाई

इश्क़ में शिकवा कुफ़्र है और हर इल्तिजा हराम

असर रामपुरी

बे-वज्ह नहीं हुस्न की तनवीर में ताबिश

असर रामपुरी

वो उन का हिजाब और नज़ाकत के नज़ारे

असर रामपुरी

वो जो नहीं हैं बज़्म में बज़्म की शान भी नहीं

असर रामपुरी

ज़िंदगी और ज़िंदगी की यादगार

असर लखनवी