Love Poetry (page 249)

तुम्हारा हुस्न आराइश तुम्हारी सादगी ज़ेवर

असर लखनवी

फिरते हुए किसी की नज़र देखते रहे

असर लखनवी

इश्क़ से लोग मना करते हैं

असर लखनवी

तस्कीन-ए-दिल को अश्क-ए-अलम क्या बहाऊँ मैं

असर लखनवी

सहरा से चले हैं सू-ए-गुलशन

असर लखनवी

निगह-ए-शौक़ को यूँ आइना-सामानी दे

असर लखनवी

नवेद-ए-वस्ल-ए-यार आए न आए

असर लखनवी

न शरह-ए-शौक़ न तस्कीन जान-ए-ज़ार में है

असर लखनवी

मुझ को हर फूल सुनाता था फ़साना तेरा

असर लखनवी

किस तरह खिलते हैं नग़्मों के चमन समझा था मैं

असर लखनवी

झपकी ज़रा जो आँख जवानी गुज़र गई

असर लखनवी

इश्क़ की गर्मी-ए-बाज़ार कहाँ से लाऊँ

असर लखनवी

हिजाब-ए-रंग-ओ-बू है और मैं हूँ

असर लखनवी

हाए रे प्यारी प्यारी आँख

असर लखनवी

दिल इश्क़ की मय से छलक रहा है

असर लखनवी

दिल गया बे-क़रारियाँ न गईं

असर लखनवी

चुपके से नाम ले के तुम्हारा कभी कभी

असर लखनवी

बहार है तिरे आरिज़ से लौ लगाए हुए

असर लखनवी

अश्क-ए-गुल-रंग निसार-ए-ग़म-ए-जानाना करें

असर लखनवी

आप बिक जाए कोई ऐसा ख़रीदार न था

असर लखनवी

आख़िर-ए-कार यही उज़्र जफ़ा का निकला

असर लखनवी

आह से जब दिल में डूबे तीर उभारे जाएँगे

असर लखनवी

ज़िंदगी तुझ से ये गिला है मुझे

असर अकबराबादी

ज़िंदगी इक नई राह पर

असर अकबराबादी

उल्फ़त के बदले उन से मिला दर्द-ए-ला-इलाज

असर अकबराबादी

उल्फ़त का है मज़ा कि 'असर' ग़म भी साथ हों

असर अकबराबादी

उदास हो न तू ऐ दिल किसी के रोने से

असर अकबराबादी

हम हुए दश्त-ए-नवर्द फिर भी न देखा तुझ को

असर अकबराबादी

फ़िक्र-ए-जहान दर्द-ए-मोहब्बत फ़िराक़-ए-यार

असर अकबराबादी

कोई हमदम बना के देखो तुम

असर अकबराबादी