Love Poetry (page 251)

गिराँ गुज़रने लगा दौर-ए-इंतिज़ार मुझे

असद भोपाली

ग़म-ए-हयात से जब वास्ता पड़ा होगा

असद भोपाली

दो-जहाँ से मावरा हो जाएगा

असद भोपाली

तकल्लुफ़ात की नज़्मों का सिलसिला है सिवा

असअ'द बदायुनी

सब इक चराग़ के परवाने होना चाहते हैं

असअ'द बदायुनी

जिसे न मेरी उदासी का कुछ ख़याल आया

असअ'द बदायुनी

गाँव की आँख से बस्ती की नज़र से देखा

असअ'द बदायुनी

चश्म-ए-इंकार में इक़रार भी हो सकता था

असअ'द बदायुनी

बिछड़ के तुझ से किसी दूसरे पे मरना है

असअ'द बदायुनी

आते हैं बर्ग-ओ-बार दरख़्तों के जिस्म पर

असअ'द बदायुनी

ये जो शाम ज़र-निगार है

असअ'द बदायुनी

जो लोग रातों को जागते थे

असअ'द बदायुनी

हम अहल-ए-ख़ौफ़

असअ'द बदायुनी

एक नज़्म

असअ'द बदायुनी

बारिश की नज़्म

असअ'द बदायुनी

वक़्त इक दरिया है दरिया सब बहा ले जाएगा

असअ'द बदायुनी

तलब की राहों में सारे आलम नए नए से

असअ'द बदायुनी

शाख़ से फूल से क्या उस का पता पूछती है

असअ'द बदायुनी

सच बोल के बचने की रिवायत नहीं कोई

असअ'द बदायुनी

सब इक चराग़ के परवाने होना चाहते हैं

असअ'द बदायुनी

पोशीदा क्यूँ है तूर पे जल्वा दिखा के देख

असअ'द बदायुनी

मिरे शजर तुझे मौसम नया बनाते रहें

असअ'द बदायुनी

मौसम-ए-हिज्र तो दाइम है न रुख़्सत होगा

असअ'द बदायुनी

ख़ुशी भी अब सरापा ग़म लगे है

असअ'द बदायुनी

कहते हैं लोग शहर तो ये भी ख़ुदा का है

असअ'द बदायुनी

जो अक्स-ए-यार तह-ए-आब देख सकते हैं

असअ'द बदायुनी

जिसे न मेरी उदासी का कुछ ख़याल आया

असअ'द बदायुनी

हवा हवस के इलाक़े दिखा रही है मुझे

असअ'द बदायुनी

गाँव की आँख से बस्ती की नज़र से देखा

असअ'द बदायुनी

बिछड़ के तुझ से किसी दूसरे पे मरना है

असअ'द बदायुनी