Love Poetry (page 252)
बड़े नादान थे हम रेत को आब-ए-रवाँ समझे
असअ'द बदायुनी
कभी कभी तो इक ऐसा मक़ाम आया है
आरज़ू सहारनपुरी
किस क़यामत का है बाज़ार तिरे कूचे में
आरज़ू सहारनपुरी
ख़ुदी की फ़ितरत-ए-ज़र्रीं के राज़-हा-ए-दरूँ
आरज़ू सहारनपुरी
अज़ल के दिन जिन्हें देखा था बज़्म-ए-हुस्न-ए-पिन्हाँ में
आरज़ू सहारनपुरी
शौक़ चढ़ती धूप जाता वक़्त घटती छाँव है
आरज़ू लखनवी
पूछा जो उन से चाँद निकलता है किस तरह
आरज़ू लखनवी
नज़र बचा के जो आँसू किए थे मैं ने पाक
आरज़ू लखनवी
नहीं वो अगली सी रौनक़ दयार-ए-हस्ती की
आरज़ू लखनवी
मोहब्बत वहीं तक है सच्ची मोहब्बत
आरज़ू लखनवी
मोहब्बत नेक-ओ-बद को सोचने दे ग़ैर-मुमकिन है
आरज़ू लखनवी
मासूम नज़र का भोला-पन ललचा के लुभाना क्या जाने
आरज़ू लखनवी
लालच भरी मोहब्बत नज़रों से गिर न जाए
आरज़ू लखनवी
ख़ुशबू कहीं छुपी है मोहब्बत के फूल की
आरज़ू लखनवी
जो कान लगा कर सुनते हैं क्या जानें रुमूज़ मोहब्बत के
आरज़ू लखनवी
जो दिल रखते हैं सीने में वो काफ़िर हो नहीं सकते
आरज़ू लखनवी
जितने हुस्न-आबाद में पहोंचे होश-ओ-ख़िरद खो कर पहोंचे
आरज़ू लखनवी
हुस्न ओ इश्क़ की लाग में अक्सर छेड़ उधर से होती है
आरज़ू लखनवी
हम को इतना भी रिहाई की ख़ुशी में नहीं होश
आरज़ू लखनवी
हाथ से किस ने साग़र पटका मौसम की बे-कैफ़ी पर
आरज़ू लखनवी
हर इक शाम कहती है फिर सुब्ह होगी
आरज़ू लखनवी
है मोहब्बत ऐसी बंधी गिरह जो न एक हाथ से खुल सके
आरज़ू लखनवी
फ़ज़ा महदूद कब है ऐ दिल-ए-वहशी फ़लक कैसा
आरज़ू लखनवी
दो तुंद हवाओं पर बुनियाद है तूफ़ाँ की
आरज़ू लखनवी
चटकी जो कली कोयल कूकी उल्फ़त की कहानी ख़त्म हुई
आरज़ू लखनवी
बुरी सरिश्त न बदली जगह बदलने से
आरज़ू लखनवी
अल्लाह अल्लाह हुस्न की ये पर्दा-दारी देखिए
आरज़ू लखनवी
यूँ दूर दूर दिल से हो हो के दिल-नशीं भी
आरज़ू लखनवी
ये दास्तान-ए-दिल है क्या हो अदा ज़बाँ से
आरज़ू लखनवी
यही इक निबाह की शक्ल है वो जफ़ा करें मैं वफ़ा करूँ
आरज़ू लखनवी