Love Poetry (page 349)

फूल पर ओस का क़तरा भी ग़लत लगता है

अहमद कमाल परवाज़ी

बराए-ज़ेब उस को गौहर-ओ-अख़्तर नहीं लगता

अहमद कमाल परवाज़ी

अमल बर-वक़्त होना चाहिए था

अहमद कमाल परवाज़ी

ये क्या चीज़ तामीर करने चले हो

अहमद जावेद

घर और बयाबाँ में कोई फ़र्क़ नहीं है

अहमद जावेद

हुस्न नजात-दहिन्दा है

अहमद जावेद

एक तअस्सुर

अहमद जावेद

एक सूरमा के नाम

अहमद जावेद

एक खेल

अहमद जावेद

अन-पढ़ गूँगे का रजज़

अहमद जावेद

आँखों की तज्दीदा

अहमद जावेद

उस के लहजे का वो उतार चढ़ाओ

अहमद जावेद

निहाल-ए-वस्ल नहीं संग-बार करने को

अहमद जावेद

मगर वो दिया ही नहीं मान कर के

अहमद जावेद

क्या पूछते हो शहर में घर और हमारा

अहमद जावेद

कोई जल में ख़ुश है कोई जाल में

अहमद जावेद

किया है दिल ने बेगाना जहान-ए-मुर्ग़-ओ-माही से

अहमद जावेद

किसी का ध्यान मह-ए-नीम-माह में आया

अहमद जावेद

गए थे वहाँ जी में क्या ठान कर के

अहमद जावेद

दिल-ए-बेताब के हमराह सफ़र में रहना

अहमद जावेद

चाक करते हैं गरेबाँ इस फ़रावानी से हम

अहमद जावेद

बारिश का है ऐसा काल

अहमद जावेद

आँसू की तरह दीदा-ए-पुर-आब में रहना

अहमद जावेद

आख़िरुल-अम्र तिरी सम्त सफ़र करते हैं

अहमद जावेद

ज़ंजीरों से बँधा हुआ हर एक यहूदी तकता था

अहमद जहाँगीर

शीराज़ की मय मर्व के याक़ूत सँभाले

अहमद जहाँगीर

जश्न मनाओ रोने वाले गिर्या भूल के मस्त रहें

अहमद जहाँगीर

गेरवे कपड़े बदन पर हाथ लोहे के कड़े

अहमद जहाँगीर

वो रात आए कि सर तेरा ले के बाज़ू पर

अहमद हुसैन माइल

तुम को मालूम जवानी का मज़ा है कि नहीं

अहमद हुसैन माइल