Love Poetry (page 361)
न निकला मुँह से कुछ निकली न कुछ भी क़ल्ब-ए-मुज़्तर की
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
लाख लाख एहसान जिस ने दर्द पैदा कर दिया
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
क्या ख़बर थी राज़-ए-दिल अपना अयाँ हो जाएगा
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
जब्र को इख़्तियार कौन करे
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
जान देते ही बनी इश्क़ के दीवाने से
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
गिरी गिर कर उठी पलटी तो जो कुछ था उठा लाई
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
बुतों के वास्ते तो दीन-ओ-ईमाँ बेच डाले हैं
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
बहार आई है फिर चमन में नसीम इठला के चल रही है
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
याद में तेरी जहाँ को भूलता जाता हूँ मैं
आग़ा हश्र काश्मीरी
चोरी कहीं खुले न नसीम-ए-बहार की
आग़ा हश्र काश्मीरी
नहीं करते वो बातें आलम-ए-रूया में भी हम से
आग़ा हज्जू शरफ़
इश्क़-बाज़ों की कहीं दुनिया में शुनवाई नहीं
आग़ा हज्जू शरफ़
इश्क़ हो जाएगा मेरी दास्तान-ए-इश्क़ से
आग़ा हज्जू शरफ़
हमेशा शेफ़्ता रखती है अपने हुस्न-ए-क़ुदरत का
आग़ा हज्जू शरफ़
दुखा देते हो तुम दिल को तो बढ़ जाता है दिल मेरा
आग़ा हज्जू शरफ़
दो वक़्त निकलने लगी लैला की सवारी
आग़ा हज्जू शरफ़
बे-वफ़ा तुम बा-वफ़ा मैं देखिए होता है क्या
आग़ा हज्जू शरफ़
वो रंगत तू ने ऐ गुल-रू निकाली
आग़ा हज्जू शरफ़
उड़ कर सुराग़-ए-कूचा-ए-दिलबर लगाइए
आग़ा हज्जू शरफ़
तीर-ए-नज़र से छिद के दिल-अफ़गार ही रहा
आग़ा हज्जू शरफ़
तिरछी नज़र न हो तरफ़-ए-दिल तो क्या करूँ
आग़ा हज्जू शरफ़
तिरी हवस में जो दिल से पूछा निकल के घर से किधर को चलिए
आग़ा हज्जू शरफ़
तिरे वास्ते जान पे खेलेंगे हम ये समाई है दिल में ख़ुदा की क़सम
आग़ा हज्जू शरफ़
तेरे आलम का यार क्या कहना
आग़ा हज्जू शरफ़
सन्नाटे का आलम क़ब्र में है है ख़्वाब-ए-अदम आराम नहीं
आग़ा हज्जू शरफ़
सलफ़ से लोग उन पे मर रहे हैं हमेशा जानें लिया करेंगे
आग़ा हज्जू शरफ़
रुलवा के मुझ को यार गुनहगार कर नहीं
आग़ा हज्जू शरफ़
रंग जिन के मिट गए हैं उन में यार आने को है
आग़ा हज्जू शरफ़
रहा करते हैं यूँ उश्शाक़ तेरी याद ओ हसरत में
आग़ा हज्जू शरफ़
पुर-नूर जिस के हुस्न से मदफ़न था कौन था
आग़ा हज्जू शरफ़