Love Poetry (page 360)
उस ने किया है वादा-ए-फ़र्दा आने दो उस को आए तो
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
नज़र बचा के वो हम से गुज़र गए चुप-चाप
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
मैं सोज़-ए-दरूँ अपना दिखा भी नहीं सकता
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
कौन है किस का ये पैग़ाम है क्या अर्ज़ करूँ
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
कर के असीर-ए-ग़म्ज़ा-ओ-नाज़-ओ-अदा मुझे
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
जब से में ने देखा है एक ख़ुशनुमा चेहरा
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
इस के घर से मेरे घर तक एक कहानी बीच में है
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
इब्न-ए-आदम बरसर पैकार है
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
हिंसा के पहले मुझे फिर रुला गया इक शख़्स
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
एहसास का वसीला-ए-इज़हार है ग़ज़ल
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
अम्न-ओ-सुल्ह-ओ-आश्ती हो जैसे बीमारी का नाम
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
आवाज़ का उस की ज़ेर-ओ-बम कुछ याद रहा कुछ भूल गए
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
अब अगर इश्क़ के आसार नहीं बदलेंगे
आग़ाज़ बरनी
वो नज़र मेहरबाँ अगर होती
आग़ाज़ बरनी
घर से निकलना जब मिरी तक़दीर हो गया
आग़ाज़ बरनी
दूर से क्या मुस्कुरा कर देखना
आग़ाज़ बरनी
बे-हिसी इंसान का हासिल न हो
आग़ाज़ बरनी
अब अगर इश्क़ के आसार नहीं बदलेंगे
आग़ाज़ बरनी
नर्म रेशम सी मुलाएम किसी मख़मल की तरह
आग़ाज़ बलडांवी
ये कैसे बाल खोले आए क्यूँ सूरत बनी ग़म की
आग़ा शायर
चलेगा नहीं मुझ पे फ़ुक़रा तुम्हारा
आग़ा शायर
पामाल कर के पूछते हैं किस अदा से वो
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
पहले इस में इक अदा थी नाज़ था अंदाज़ था
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
मिलना न मिलना ये तो मुक़द्दर की बात है
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
किस तरह जवानी में चलूँ राह पे नासेह
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
कलेजे में हज़ारों दाग़ दिल में हसरतें लाखों
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
ज़र्रा भी अगर रंग-ए-ख़ुदाई नहीं देता
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
उर्यां ही रहे लाश ग़रीब-उल-वतनी में
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
शाइर-ए-रंगीं फ़साना हो गया
आग़ा शाएर क़ज़लबाश
रोने से जो भड़ास थी दिल की निकल गई
आग़ा शाएर क़ज़लबाश