Love Poetry (page 362)
पाया तिरे कुश्तों ने जो मैदान-ए-बयाबाँ
आग़ा हज्जू शरफ़
परी-पैकर जो मुझ वहशी का पैराहन बनाते हैं
आग़ा हज्जू शरफ़
नाहक़ ओ हक़ का उन्हें ख़ौफ़-ओ-ख़तर कुछ भी नहीं
आग़ा हज्जू शरफ़
मौसम-ए-गुल में जो घिर घिर के घटाएँ आईं
आग़ा हज्जू शरफ़
लुटाते हैं वो बाग़-ए-इश्क़ जाए जिस का जी चाहे
आग़ा हज्जू शरफ़
किस के हाथों बिक गया किस के ख़रीदारों में हूँ
आग़ा हज्जू शरफ़
ख़ुदा-मालूम किस की चाँद से तस्वीर मिट्टी की
आग़ा हज्जू शरफ़
जो सामना भी कभी यार-ए-ख़ूब-रू से हुआ
आग़ा हज्जू शरफ़
जवानी आई मुराद पर जब उमंग जाती रही बशर की
आग़ा हज्जू शरफ़
जश्न था ऐश-ओ-तरब की इंतिहा थी मैं न था
आग़ा हज्जू शरफ़
जब से हुआ है इश्क़ तिरे इस्म-ए-ज़ात का
आग़ा हज्जू शरफ़
इश्क़-ए-दहन में गुज़री है क्या कुछ न पूछिए
आग़ा हज्जू शरफ़
इलाही ख़ैर जो शर वाँ नहीं तो याँ भी नहीं
आग़ा हज्जू शरफ़
हम हैं ऐ यार चढ़ाए हुए पैमाना-ए-इश्क़
आग़ा हज्जू शरफ़
हुए ऐसे ब-दिल तिरे शेफ़्ता हम दिल-ओ-जाँ को हमेशा निसार किया
आग़ा हज्जू शरफ़
हुआ है तौर-ए-बर्बादी जो बे-दस्तूर पहलू में
आग़ा हज्जू शरफ़
हवस गुलज़ार की मिस्ल-ए-अनादिल हम भी रखते थे
आग़ा हज्जू शरफ़
घिसते घिसते पाँव में ज़ंजीर आधी रह गई
आग़ा हज्जू शरफ़
फ़स्ल-ए-गुल में है इरादा सू-ए-सहरा अपना
आग़ा हज्जू शरफ़
दिल को लटका लिया है गेसू में
आग़ा हज्जू शरफ़
दिल को अफ़सोस-ए-जवानी है जवानी अब कहाँ
आग़ा हज्जू शरफ़
दरपेश अजल है गंज-ए-शहीदाँ ख़रिदिए
आग़ा हज्जू शरफ़
चलते हैं गुलशन-ए-फ़िरदौस में घर लेते हैं
आग़ा हज्जू शरफ़
चाहिएँ मुझ को नहीं ज़र्रीं क़फ़स की पुतलियाँ
आग़ा हज्जू शरफ़
बुलबुल का दिल ख़िज़ाँ के सदमे से हिल रहा है
आग़ा हज्जू शरफ़
आलम में हरे होंगे अश्जार जो मैं रोया
आग़ा हज्जू शरफ़
आग लगा दी पहले गुलों ने बाग़ में वो शादाबी की
आग़ा हज्जू शरफ़
पेश आने लगे हैं नफ़रत से
अफ़ज़ल पेशावरी
नौजवानी में अजब दिल की लगी होती है
अफ़ज़ल पेशावरी
फ़ुसूँ टूटता है
अफ़ज़ल परवेज़