Love Poetry (page 364)
एक पैकर यूँ चमक उट्ठा है मेरे ध्यान में
अफ़ज़ल मिनहास
चुप रहे तो शहर की हंगामा आराई मिली
अफ़ज़ल मिनहास
अपने माहौल से कुछ यूँ भी तो घबराए न थे
अफ़ज़ल मिनहास
अपने माहौल से कुछ यूँ भी तो घबराए न थे
अफ़ज़ल मिनहास
ये मोहब्बत के महल ता'मीर करना छोड़ दे
अफ़ज़ल ख़ान
तभी तो मैं मोहब्बत का हवालाती नहीं होता
अफ़ज़ल ख़ान
शिकस्त-ए-ज़िंदगी वैसे भी मौत ही है ना
अफ़ज़ल ख़ान
मुझे रोना नहीं आवाज़ भी भारी नहीं करनी
अफ़ज़ल ख़ान
इसी लिए हमें एहसास-ए-जुर्म है शायद
अफ़ज़ल ख़ान
बिछड़ने का इरादा है तो मुझ से मशवरा कर लो
अफ़ज़ल ख़ान
वो जो इक शख़्स वहाँ है वो यहाँ कैसे हो
अफ़ज़ल ख़ान
उस लम्हे तिश्ना-लब रेत भी पानी होती है
अफ़ज़ल ख़ान
तो फिर वो इश्क़ ये नक़्द-ओ-नज़र बराए-फ़रोख़्त
अफ़ज़ल ख़ान
तभी तो मैं मोहब्बत का हवालाती नहीं होता
अफ़ज़ल ख़ान
शिकस्त-ए-ज़िंदगी वैसे भी मौत ही है ना
अफ़ज़ल ख़ान
राह भोला हूँ मगर ये मिरी ख़ामी तो नहीं
अफ़ज़ल ख़ान
मुझे रोना नहीं आवाज़ भी भारी नहीं करनी
अफ़ज़ल ख़ान
जब इक सराब में प्यासों को प्यास उतारती है
अफ़ज़ल ख़ान
हमारे ख़ून के प्यासे पशेमानी से मर जाएँ
अफ़ज़ल ख़ान
आज ही फ़ुर्सत से कल का मसअला छेड़ूँगा मैं
अफ़ज़ल ख़ान
आदमी ख़्वार भी होता है नहीं भी होता
अफ़ज़ल ख़ान
यहाँ भला कौन अपनी मर्ज़ी से जी रहा है
अफ़ज़ल गौहर राव
मिरी नज़र तो ख़लाओं ने बाँध रक्खी थी
अफ़ज़ल गौहर राव
मैं एक इश्क़ में नाकाम क्या हुआ 'गौहर'
अफ़ज़ल गौहर राव
कौन सी ऐसी कमी मेरे ख़द-ओ-ख़ाल में है
अफ़ज़ल गौहर राव
हिज्र में इतना ख़सारा तो नहीं हो सकता
अफ़ज़ल गौहर राव
चंद लोगों की मोहब्बत भी ग़नीमत है मियाँ
अफ़ज़ल गौहर राव
ज़मीं से आगे भला जाना था कहाँ मैं ने
अफ़ज़ल गौहर राव
ये जो सूरज है ये सूरज भी कहाँ था पहले
अफ़ज़ल गौहर राव
तेरी दुनिया से ये दिल इस लिए घबराता है
अफ़ज़ल गौहर राव