Love Poetry (page 359)

मैं तो मिट्टी हो रहा था इश्क़ में लेकिन 'अता'

अहमद अता

हम आस्तान-ए-ख़ुदा-ए-सुख़न पे बैठे थे

अहमद अता

हँसते हँसते हो गया बर्बाद मैं

अहमद अता

बाग़-ए-हवस में कुछ नहीं दिल है तो ख़ुशनुमा है दिल

अहमद अता

अब यहाँ कौन निकालेगा भला दूध की नहर

अहमद अता

आज देखा है उसे ऐसी मोहब्बत से 'अता'

अहमद अता

ये मिरा वहम तो कुछ और सुना जाता है

अहमद अता

ये अक्स आप ही बनते हैं हम से मिलते हैं

अहमद अता

वो ज़माना है कि अब कुछ नहीं दीवाने में

अहमद अता

सफ़्हा-ए-ज़ीस्त जब पढूँगा तुम्हें

अहमद अता

मिरे लिए तिरा होना अहम ज़ियादा है

अहमद अता

मैं तिरी मानता लेकिन जो मिरा दिल है ना

अहमद अता

मैं न होने से हुआ या'नी बड़ी तक़्सीर की

अहमद अता

इश्क़ से भाग के जाया भी नहीं जा सकता

अहमद अता

हमारा इश्क़ सलामत है यानी हम अभी हैं

अहमद अता

इक रात मैं सो नहीं सका था

अहमद अता

इक अश्क बहा होगा

अहमद अता

दोनों के जो दरमियाँ ख़ला है

अहमद अता

बेबसी ऐसी भी होती है भला

अहमद अता

ऐ मियाँ कौन ये कहता है मोहब्बत की है

अहमद अता

तर्क-ए-उल्फ़त के ब'अद भी 'अश्फ़ाक़'

अहमद अशफ़ाक़

तुम जो आ जाओ ग़म धुआँ हो जाए

अहमद अशफ़ाक़

सब जल गया जलते हुए ख़्वाबों के असर से

अहमद अशफ़ाक़

जितनी हम चाहते थे उतनी मोहब्बत नहीं दी

अहमद अशफ़ाक़

हम तिरे इश्क़ में कुछ ऐसे ठिकाने लग जाएँ

अहमद अशफ़ाक़

गए दिनों की रक़ाबत को वो भुला न सके

अहमद अशफ़ाक़

दे के वो सारे इख़्तियार मुझे

अहमद अशफ़ाक़

वफ़ा कम है नज़र आती बहुत है

अहमद अल्वी

ज़िंदगी उस ने बदल कर मिरी रख दी ऐसी

अहमद अली बर्क़ी आज़मी

वो हस्ब-ए-वादा न आया तो आँख भर आई

अहमद अली बर्क़ी आज़मी