Love Poetry (page 85)
कभी बे-कली कभी बे-दिली है अजीब इश्क़ की ज़िंदगी
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
जब कोई फ़ित्ना-ए-अय्याम नहीं होता है
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
इज़हार-ए-ग़म किया था ब-उम्मीद-ए-इल्तिफ़ात
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
हाए बे-दाद-ए-मोहब्बत कि ये ईं बर्बादी
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
एक काबा के सनम तोड़े तो क्या
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
चश्म-ए-सय्याद पे हर लहज़ा नज़र रखता है
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
ब-सद अदा-ए-दिलबरी है इल्तिजा-ए-मय-कशी
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
आश्ना जब तक न था उस की निगाह-ए-लुत्फ़ से
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
ये ग़म नहीं है कि अब आह-ए-ना-रसा भी नहीं
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
वो दर्द-ए-इश्क़ जिस को हासिल-ए-ईमाँ भी कहते हैं
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
उन निगाहों को अजब तर्ज़-ए-कलाम आता है
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
नवेद-ए-आमद-ए-फ़स्ल-ए-बहार भी तो नहीं
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
न बेताबी न आशुफ़्ता-सरी है
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
कुछ भी दुश्वार नहीं अज़्म-ए-जवाँ के आगे
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
ख़िज़ाँ-नसीब की हसरत ब-रू-ए-कार न हो
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
जबीं-ए-नवाज़ किसी की फ़ुसूँ-गरी क्यूँ है
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
दुनिया को रू-शनास-ए-हक़ीक़त न कर सके
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
और ऐ चश्म-ए-तरब बादा-ए-गुलफ़ाम अभी
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
याद जो आए ख़ुद शरमाएँ उफ़ री जवानी हाए ज़माने
हबीब आरवी
इस तरह दर्द का तुम अपने मुदावा करना
हबीब आरवी
हैं धब्बे तेग़-ए-क़ातिल के जिसे धोने नहीं देते
हबीब आरवी
चाहते भी हैं चाहते भी नहीं
हबाब तिर्मिज़ी
तमाम रात बुझेंगे न मेरे घर के चराग़
हबाब तिर्मिज़ी
ख़ुश-नज़र है न ख़ुश-ख़याल है ये
हबाब तिर्मिज़ी
दश्त-ए-ग़म में साया-ए-गेसू न ढूँढ
हबाब तिर्मिज़ी
आज उन्हें देख लिया बज़्म में फ़र्ज़ानों की
हबाब तिर्मिज़ी
उमीद-ओ-बीम के आलम में दिल दहलता है
हबाब हाश्मी
तिश्ना-ए-तकमील है वहशत का अफ़्साना अभी
ग्यान चन्द मंसूर
हुआ करे जो अँधेरा बहुत घनेरा है
ज्ञान चंद जैन
धरती और अम्बर पर दोनों क्या रानाई बाँट रहे थे
ग्यान चन्द