Love Poetry (page 86)

फिरता हूँ मैं घाटी घाटी सहरा सहरा तन्हा तन्हा

ग्यान चन्द

क्या बताएँ आप से क्या हस्ती-ए-इंसान है

ग्यान चन्द

क्या बताएँ आप से क्या हस्ती-ए-इंसान है

ग्यान चन्द

उड़ना तो बहुत उड़ना अफ़्लाक पे जा रहना

गुलज़ार वफ़ा चौदरी

तेज़ हवाओ अब डरना घबराना कैसा

गुलज़ार वफ़ा चौदरी

पुराने पेड़ को मौसम नई क़बाएँ दे

गुलज़ार वफ़ा चौदरी

कौन सी मंज़िल है जो बे-ख़्वाब आँखों में नहीं

गुलज़ार वफ़ा चौदरी

धूल न बनना आईनों पर बार न होना

गुलज़ार वफ़ा चौदरी

हाए क्या दौर-ए-ज़िंदगी गुज़रा

गुलज़ार देहलवी

उस सितमगर की मेहरबानी से

गुलज़ार देहलवी

उम्र जो बे-ख़ुदी में गुज़री है

गुलज़ार देहलवी

फ़लाह-ए-आदमियत में सऊबत सह के मर जाना

गुलज़ार देहलवी

कौन पस-ए-मंज़र में उजड़े पैकरों को देखता

गुलज़ार बुख़ारी

ज़ाब्ते और ही मिस्दाक़ पे रक्खे हुए हैं

गुलज़ार बुख़ारी

वफ़ा की तश्हीर करने वाला फ़रेब-गर है सितम तो ये है

गुलज़ार बुख़ारी

उस का चेहरा भी चमक में न मिसाली निकला

गुलज़ार बुख़ारी

तिरी तलब ने फ़लक पे सब के सफ़र का अंजाम लिख दिया है

गुलज़ार बुख़ारी

मोहब्बत के सिवा हर्फ़-ओ-बयाँ से कुछ नहीं होता

गुलज़ार बुख़ारी

कितनी सदियाँ ना-रसी की इंतिहा में खो गईं

गुलज़ार बुख़ारी

हम शाद हों क्या जब तक आज़ार सलामत है

गुलज़ार बुख़ारी

अक्स-ए-रौशन तिरा आईना-ए-जाँ में रक्खा

गुलज़ार बुख़ारी

आँधी में बिसात उलट गई है

गुलज़ार बुख़ारी

ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा

गुलज़ार

ज़िंदगी पर भी कोई ज़ोर नहीं

गुलज़ार

ये शुक्र है कि मिरे पास तेरा ग़म तो रहा

गुलज़ार

कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है

गुलज़ार

ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में

गुलज़ार

काँच के पार तिरे हाथ नज़र आते हैं

गुलज़ार

आग में क्या क्या जला है शब भर

गुलज़ार

वो जो शाएर था

गुलज़ार