Sad Poetry (page 16)

धूम इतनी तिरे दीवाने मचा सकते हैं

इंशा अल्लाह ख़ान

देखना जब मुझे कर शान ये गाली देना

इंशा अल्लाह ख़ान

छेड़ने का तो मज़ा जब है कहो और सुनो

इंशा अल्लाह ख़ान

चाहता हूँ तुझे नबी की क़सम

इंशा अल्लाह ख़ान

भले आदमी कहीं बाज़ आ अरे उस परी के सुहाग से

इंशा अल्लाह ख़ान

बंदगी हम ने तो जी से अपनी ठानी आप की

इंशा अल्लाह ख़ान

बात के साथ ही मौजूद है टाल एक न एक

इंशा अल्लाह ख़ान

अश्क मिज़्गान-ए-तर की पूँजी है

इंशा अल्लाह ख़ान

अमरद हुए हैं तेरे ख़रीदार चार पाँच

इंशा अल्लाह ख़ान

अच्छा जो ख़फ़ा हम से हो तुम ऐ सनम अच्छा

इंशा अल्लाह ख़ान

उस के नाम जिसे तारीकी निगल चुकी

इंजिला हमेश

तज़ाद

इंजिला हमेश

शाख़-ए-अदम

इंजिला हमेश

रक़्स-ए-आगही

इंजिला हमेश

मोहब्बत

इंजिला हमेश

ख़ुदा से कलाम

इंजिला हमेश

जिला

इंजिला हमेश

हर्फ़-ए-मुक़द्दर

इंजिला हमेश

एक कहानी इश्क़ की

इंजिला हमेश

बाज़याफ़्त

इंजिला हमेश

सस्ती नज़्म

इंजील सहीफ़ा

ले-बाई एरिया

इंजील सहीफ़ा

दिसम्बर आ गया है

इंजील सहीफ़ा

अन-छूई कथा

इंजील सहीफ़ा

सीप मुट्ठी में है आफ़ाक़ भी हो सकता है

इंजील सहीफ़ा

मुझे साँसों की है थोड़ पिया

इंजील सहीफ़ा

फ़ज़ा में रंग से बिखरे हैं चाँदनी हुई है

इंजील सहीफ़ा

टूटा फूटा सही एहसास-ए-अना है मुझ में

इंद्र सरूप श्रीवास्तवा

पानी मिट कर भी रह गया पानी

इंद्र मोहन मेहता कैफ़

मिटती क़द्रों में भी पाबंद-ए-वफ़ा हैं हम लोग

इंद्र मोहन मेहता कैफ़