Sad Poetry (page 17)
किस को हम-सफ़र समझें जो भी साथ चलते हैं
इंद्र मोहन मेहता कैफ़
दिल की राहों से दबे पाँव गुज़रने वाला
इंद्र मोहन मेहता कैफ़
आसमानों से न उतरेगा सहीफ़ा कोई
इंद्र मोहन मेहता कैफ़
यही फ़साना रहा है जुनूँ के सहरा में
इन्दिरा वर्मा
शिकस्ता-दिल अँधेरी शब अकेला राहबर क्यूँ हो
इन्दिरा वर्मा
कैसे सहरा में भटकता है मिरा तिश्ना लब
इन्दिरा वर्मा
यूँ वफ़ा के सारे निभाओ ग़म कि फ़रेब में भी यक़ीन हो
इन्दिरा वर्मा
ये शफ़क़ चाँद सितारे नहीं अच्छे लगते
इन्दिरा वर्मा
ये मौसम सुरमई है और मैं हूँ
इन्दिरा वर्मा
उस से मत कहना मिरी बे-सर-ओ-सामानी तक
इन्दिरा वर्मा
तिरे ख़याल का चर्चा तिरे ख़याल की बात
इन्दिरा वर्मा
तमाम फ़िक्र ज़माने की टाल देता है
इन्दिरा वर्मा
शिकस्ता-दिल अँधेरी शब अकेला राहबर क्यूँ हो
इन्दिरा वर्मा
मुझे रंग दे न सुरूर दे मिरे दिल में ख़ुद को उतार दे
इन्दिरा वर्मा
मोहब्बत में आया है तन्हा अभी रंग
इन्दिरा वर्मा
कुछ बला और कुछ सितम ही सही
इन्दिरा वर्मा
कभी मुड़ के फिर इसी राह पर न तो आए तुम न तो आए हम
इन्दिरा वर्मा
दोस्त जब ज़ी-वक़ार होता है
इन्दिरा वर्मा
दिल से अपने ख़ुद-ब-ख़ुद कुछ पूछिए मेरे लिए
इन्दिरा वर्मा
दिल के बेचैन जज़ीरों में उतर जाएगा
इन्दिरा वर्मा
अभी से कैसे कहूँ तुम को बेवफ़ा साहब
इन्दिरा वर्मा
आज फिर चाँद उस ने माँगा है
इन्दिरा वर्मा
सावन की इस रिम-झिम में
इंद्र सराज़ी
ख़ूब थी अब मगर बदल सी गई
इंद्र सराज़ी
जिस का डर था वही हुआ यारो
इंद्र सराज़ी
दुख उदासी मलाल ग़म के सिवा
इंद्र सराज़ी
बड़ी मुश्किल से बहलाया था ख़ुद को
इंद्र सराज़ी
रोते हैं जब भी हम दिसम्बर में
इंद्र सराज़ी
रहती है सब के पास तन्हाई
इंद्र सराज़ी
दिन में जो साथ सब के हँसता था
इंद्र सराज़ी