Sad Poetry (page 14)

कितने भूले हुए नग़्मात सुनाने आए

इक़बाल अशहर

ख़ुदा ने लाज रखी मेरी बे-नवाई की

इक़बाल अशहर

कभी कसक जुदाई की कभी महक विसाल की

इक़बाल अशहर

भीगी भीगी पलकों पर ये जो इक सितारा है

इक़बाल अशहर

बदन में अव्वलीं एहसास है तकानों का

इक़बाल अशहर

ज़रा सी बात से मंज़र बदल भी सकता था

इक़बाल अंजुम

मुझ पर निगाह-ए-गर्दिश-ए-दौराँ नहीं रही

इक़बाल आबिदी

मिले वो दर्स मुझ को ज़िंदगी से

इक़बाल आबिदी

मेरी फ़रियाद पे रोया है चमन मेरे बा'द

इक़बाल आबिदी

काम आ गई है गर्दिश-ए-दौराँ कभी कभी

इक़बाल आबिदी

न पूछो दोस्तो मैं किस तरह हँसता हँसाता हूँ

इन्तिज़ार ग़ाज़ीपुरी

कहीं शबनम कहीं ख़ुशबू कहीं ताज़ा कली रखना

इन्तिज़ार ग़ाज़ीपुरी

दुनिया से कौन जाता है अपनी ख़ुशी के साथ

इन्तिज़ार ग़ाज़ीपुरी

बिजलियों के रक़ीब होते हैं

इन्तिज़ार ग़ाज़ीपुरी

लोग न जाने कैसी कैसी बातें करते हैं

इंतिख़ाब सय्यद

शोर से बच कर सहमा सहमा बैठा है चुप-चाप

इंतिख़ाब सय्यद

हर एक शख़्स के विज्दान से ख़िताब करे

इंतिख़ाब सय्यद

अंदेशों का ज़हर पिया है

इंतिख़ाब सय्यद

चाँद

इंतिख़ाब अालम

हरा-भरा था चमन में शजर अकेला था

इंतिख़ाब अालम

बैठ जाता था मैं थक कर अपने तन की छाँव में

इंतिख़ाब अालम

कौन सा ग़म है मिरे दिल में जो मेहमान नहीं

इन्तेसार हुसैन आबिदी शाहिद

उस संग-दिल के हिज्र में चश्मों को अपने आह

इंशा अल्लाह ख़ान

छेड़ने का तो मज़ा जब है कहो और सुनो

इंशा अल्लाह ख़ान

ज़िन्हार हिम्मत अपने से हरगिज़ न हारिए

इंशा अल्लाह ख़ान

ज़मीं से उट्ठी है या चर्ख़ पर से उतरी है

इंशा अल्लाह ख़ान

ये जो मुझ से और जुनूँ से याँ बड़ी जंग होती है देर से

इंशा अल्लाह ख़ान

यास-ओ-उमीद-ओ-शादी-ओ-ग़म ने धूम उठाई सीने में

इंशा अल्लाह ख़ान

या वस्ल में रखिए मुझे या अपनी हवस में

इंशा अल्लाह ख़ान

वो परी ही नहीं कुछ हो के कड़ी मुझ से लड़ी

इंशा अल्लाह ख़ान