Sad Poetry (page 13)

मुझे अपने ज़ब्त पे नाज़ था सर-ए-बज़्म रात ये क्या हुआ

इक़बाल अज़ीम

माना कि ज़िंदगी से हमें कुछ मिला भी है

इक़बाल अज़ीम

हम बहुत दूर निकल आए हैं चलते चलते

इक़बाल अज़ीम

बस हो चुका हुज़ूर ये पर्दे हटाइए

इक़बाल अज़ीम

अल्लाह रे यादों की ये अंजुमन-आराई

इक़बाल अज़ीम

अब इसे क्या करे कोई आँखों में रौशनी नहीं

इक़बाल अज़ीम

आँखों से नूर दिल से ख़ुशी छीन ली गई

इक़बाल अज़ीम

ज़वाल-ए-फ़िक्र-ओ-फ़न था और मैं था

इक़बाल अासिफ़

क़ैद-ए-कौन-ओ-मकान से निकला

इक़बाल अासिफ़

कोई अच्छा लगे कितना ही भरोसा न करो

इक़बाल अासिफ़

जो हो सके तो कभी इतनी मेहरबानी कर

इक़बाल अासिफ़

बर्ग ठहरे न जब समर ठहरे

इक़बाल अासिफ़

ये ख़ौफ़ कम है मुझे और चमको जब तक हो

इक़बाल अशहर कुरेशी

सब तमन्नाओं से ख़्वाबों से निकल आए हैं

इक़बाल अशहर कुरेशी

फ़रार पा न सका कोई रास्ता मुझ से

इक़बाल अशहर कुरेशी

वो किसी को याद कर के मुस्कुराया था उधर

इक़बाल अशहर

ठहरी ठहरी सी तबीअत में रवानी आई

इक़बाल अशहर

किसी को खो के पा लिया किसी को पा के खो दिया

इक़बाल अशहर

जो उस के होंटों की जुम्बिश में क़ैद था 'अशहर'

इक़बाल अशहर

आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा

इक़बाल अशहर

उर्दू

इक़बाल अशहर

ये नहीं पहले तिरी याद से निस्बत कम थी

इक़बाल अशहर

वो भी कुछ भूला हुआ था मैं कुछ भटका हुआ

इक़बाल अशहर

ठहरी ठहरी सी तबीअत में रवानी आई

इक़बाल अशहर

तमाशाई बने रहिए तमाशा देखते रहिए

इक़बाल अशहर

सिलसिला ख़त्म हुआ जलने जलाने वाला

इक़बाल अशहर

रास्ता भूल गया एक सितारा अपना

इक़बाल अशहर

रात का पिछ्ला पहर कैसी निशानी दे गया

इक़बाल अशहर

प्यास के बेदार होने का कोई रस्ता न था

इक़बाल अशहर

प्यास दरिया की निगाहों से छुपा रक्खी है

इक़बाल अशहर