Sad Poetry (page 24)
'इश्क़ी'-साहिब लिखना है तो कोई नई तहरीर लिखो
इलियास इश्क़ी
गरचे क़लम से कुछ न लिखेंगे मुँह से कुछ नहीं बोलेंगे
इलियास इश्क़ी
ज़ीस्त-मिज़ाजों का नौहा
इलियास बाबर आवान
शत्तुल-अरब
इलियास बाबर आवान
शाही बदला
इलियास बाबर आवान
स्कैप-इज़्म
इलियास बाबर आवान
पागल
इलियास बाबर आवान
मस्जिद-ए-अहमरीं
इलियास बाबर आवान
ख़्वाजा-सरा
इलियास बाबर आवान
हमारे दिन गुज़र गए
इलियास बाबर आवान
ग़ैर-निसाबी तारीख़
इलियास बाबर आवान
आदमी
इलियास बाबर आवान
थोड़ी चाँदी थोड़ा गारा लगता है
इलियास बाबर आवान
फूल किताबें ले जा, तन्हा रहने दे
इलियास बाबर आवान
मेरा और फूलों का रिश्ता टूट गया
इलियास बाबर आवान
इश्क़ करता हूँ, तक़ाज़ा नहीं कर सकता मैं
इलियास बाबर आवान
हिज्र की मसाफ़त में साथ तू रहा हर दम
इकराम मुजीब
एक दर्द की लज़्ज़त बरक़रार रखने को
इकराम मुजीब
ज़हर में बुझे सारे तीर हैं कमानों पर
इकराम मुजीब
ये कमाल भी तो कम नहीं तिरा
इकराम मुजीब
मौत सी ख़मोशी जब उन लबों पे तारी की
इकराम मुजीब
और ही कहीं ठहरे और ही कहीं पहुँचे
इकराम मुजीब
ऐ ख़ुदा भरम रखना बरक़रार इस घर का
इकराम मुजीब
क्या जाने किस की धुन में रहा दिल-फ़िगार चाँद
इकराम जनजुआ
नशात-ए-नौ की तलब है न ताज़ा ग़म का जिगर
इकराम आज़म
ले चले हो तो कहीं दूर ही ले जाना मुझे
इकराम आज़म
हर राहत-ए-जाँ लम्हे से उफ़्ताद की ज़िद है
इकराम आज़म
ख़िरद को ख़ाना-ए-दिल का निगह-बाँ कर दिया हम ने
इज्तिबा रिज़वी
ज़ुहूर-ए-पैकरी सहरा में है सिर्फ़ इक निशाँ मेरा
इज्तिबा रिज़वी
ख़िरद को ख़ाना-ए-दिल का निगह-बाँ कर दिया हम ने
इज्तिबा रिज़वी