Sad Poetry (page 26)
ख़ुद को हुजूम-ए-दहर में खोना पड़ा मुझे
इफ़्तिख़ार नसीम
जिला-वतन हूँ मिरा घर पुकारता है मुझे
इफ़्तिख़ार नसीम
इस क़दर भी तो न जज़्बात पे क़ाबू रक्खो
इफ़्तिख़ार नसीम
हाथ लहराता रहा वो बैठ कर खिड़की के साथ
इफ़्तिख़ार नसीम
हाथ हाथों में न दे बात ही करता जाए
इफ़्तिख़ार नसीम
है जुस्तुजू अगर इस को इधर भी आएगा
इफ़्तिख़ार नसीम
बन गया है जिस्म गुज़रे क़ाफ़िलों की गर्द सा
इफ़्तिख़ार नसीम
तू मुझ से मेरे ज़मानों का पूछती है तो सुन!
इफ़्तिख़ार मुग़ल
सवाद-ए-हिज्र में रक्खा हुआ दिया हूँ मैं
इफ़्तिख़ार मुग़ल
इक ख़ला, एक ला-इंतिहा और मैं
इफ़्तिख़ार मुग़ल
आँख झपकी थी बस इक लम्हे को और इस के ब'अद
इफ़्तिख़ार मुग़ल
सवाद-ए-हिज्र में रक्खा हुआ दिया हूँ मैं
इफ़्तिख़ार मुग़ल
रख-रखाव में कोई ख़्वार नहीं होता यार
इफ़्तिख़ार मुग़ल
मैं भी बे-अंत हूँ और तू भी है गहरा सहरा
इफ़्तिख़ार मुग़ल
किसी सबब से अगर बोलता नहीं हूँ मैं
इफ़्तिख़ार मुग़ल
जमाल-गाह-ए-तग़ज़्ज़ुल की ताब-ओ-तब तिरी याद
इफ़्तिख़ार मुग़ल
इक ख़ला, एक ला-इंतिहा और मैं
इफ़्तिख़ार मुग़ल
नश्तर-ए-ग़म न जिस को रास आया
इफ़्तिख़ार जमील शाहीन
ये तिरा बाँकपन ये रानाई
इफ़्तिख़ार जमील शाहीन
धुँद
इफ़्तेख़ार जालिब
चूमता पानी, पानी पानी
इफ़्तेख़ार जालिब
वो ख़्वाब था बिखर गया ख़याल था मिला नहीं
इफ़्तिख़ार इमाम सिद्दीक़ी
जो चुप रहा तो वो समझेगा बद-गुमान मुझे
इफ़्तिख़ार इमाम सिद्दीक़ी
दर्द की सारी तहें और सारे गुज़रे हादसे
इफ़्तिख़ार इमाम सिद्दीक़ी
वो ख़्वाब था बिखर गया ख़याल था मिला नहीं
इफ़्तिख़ार इमाम सिद्दीक़ी
तू नहीं तो ज़िंदगी में और क्या रह जाएगा
इफ़्तिख़ार इमाम सिद्दीक़ी
तिरे क़रीब रहूँ या कि दूर जाऊँ मैं
इफ़्तिख़ार इमाम सिद्दीक़ी
बिखर ही जाऊँगा मैं भी हवा उदासी है
इफ़्तिख़ार इमाम सिद्दीक़ी
दर-ओ-दीवार ख़ुद-कुशी कर लें
इफ़्तिख़ार फलक काज़मी
दश्त-ए-बे-सम्त में रुकना भी सफ़र ऐसा था
इफ़्तिख़ार बुख़ारी