Sad Poetry (page 28)
एक उदास शाम के नाम
इफ़्तिख़ार आरिफ़
एक शायर एक नज़्म
इफ़्तिख़ार आरिफ़
एक सवाल
इफ़्तिख़ार आरिफ़
एक रुख़
इफ़्तिख़ार आरिफ़
एक ख़्वाब की दूरी पर
इफ़्तिख़ार आरिफ़
एक कहानी बहुत पुरानी
इफ़्तिख़ार आरिफ़
बारहवाँ खिलाड़ी
इफ़्तिख़ार आरिफ़
बन-बास
इफ़्तिख़ार आरिफ़
बद-शुगूनी
इफ़्तिख़ार आरिफ़
और हवा चुप रही
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ज़रा सी देर को आए थे ख़्वाब आँखों में
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ये बस्तियाँ हैं कि मक़्तल दुआ किए जाएँ
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ये बस्ती जानी-पहचानी बहुत है
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ये अब खुला कि कोई भी मंज़र मिरा न था
इफ़्तिख़ार आरिफ़
वही प्यास है वही दश्त है वही घराना है
इफ़्तिख़ार आरिफ़
वफ़ा की ख़ैर मनाता हूँ बेवफ़ाई में भी
इफ़्तिख़ार आरिफ़
उमीद-ओ-बीम के मेहवर से हट के देखते हैं
इफ़्तिख़ार आरिफ़
तार-ए-शबनम की तरह सूरत-ए-ख़स टूटती है
इफ़्तिख़ार आरिफ़
सुख़न-ए-हक़ को फ़ज़ीलत नहीं मिलने वाली
इफ़्तिख़ार आरिफ़
सितारा-वार जले फिर बुझा दिए गए हम
इफ़्तिख़ार आरिफ़
शिकस्ता-पर जुनूँ को आज़माएँगे नहीं क्या
इफ़्तिख़ार आरिफ़
शहर-ए-गुल के ख़स-ओ-ख़ाशाक से ख़ौफ़ आता है
इफ़्तिख़ार आरिफ़
सर-ए-बाम-ए-हिज्र दिया बुझा तो ख़बर हुई
इफ़्तिख़ार आरिफ़
समझ रहे हैं मगर बोलने का यारा नहीं
इफ़्तिख़ार आरिफ़
सब चेहरों पर एक ही रंग और सब आँखों में एक ही ख़्वाब
इफ़्तिख़ार आरिफ़
रविश में गर्दिश-ए-सय्यारगाँ से अच्छी है
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मुल्क-ए-सुख़न में दर्द की दौलत को क्या हुआ
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मेरा मालिक जब तौफ़ीक़ अर्ज़ानी करता है
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मंज़र से हैं न दीदा-ए-बीना के दम से हैं
इफ़्तिख़ार आरिफ़
मंसब न कुलाह चाहता हूँ
इफ़्तिख़ार आरिफ़