Sad Poetry (page 30)
दर्द अब दिल की दवा हो जैसे
इफ़्तिख़ार आज़मी
मंज़िलें आईं तो रस्ते खो गए
इफ़्फ़त ज़र्रीं
ख़्वाब आँखों से ज़बाँ से हर कहानी ले गया
इफ़्फ़त ज़र्रीं
अजीब कर्ब-ए-मुसलसल दिल-ओ-नज़र में रहा
इफ़्फ़त ज़र्रीं
अगर वो मिल के बिछड़ने का हौसला रखता
इफ़्फ़त ज़र्रीं
शब-ए-फ़ुर्क़त की तन्हाई का लम्हा
इफ़्फ़त अब्बास
रहमतों में तिरी आग़ोश की पाले गए हम
इफ़्फ़त अब्बास
रह-ए-जुस्तुजू में भटक गए तो किसी से कोई गिला नहीं
इफ़्फ़त अब्बास
मिरी मोहब्बत की बे-ख़ुदी को तलाश-ए-हक़्क़-ए-जलाल देना
इफ़्फ़त अब्बास
ख़ूँ में तर सब्र की चादर कहाँ ले जाओगे
इफ़्फ़त अब्बास
है ये शहर-ए-इश्क़ याँ आब-ओ-हवा कुछ और है
इफ़्फ़त अब्बास
है ये मर मिटने का इनआ'म तुम्हें क्या मा'लूम
इफ़्फ़त अब्बास
एक मुद्दत से सर-ए-दोश-ए-हवा हूँ मैं भी
इफ़्फ़त अब्बास
वही न हो कि ये सब लोग साँस लेने लगें
इदरीस बाबर
मौत उकता चुकी रीहरसल में
इदरीस बाबर
मौत की पहली अलामत साहिब
इदरीस बाबर
मैं जिन्हें याद हूँ अब तक यही कहते होंगे
इदरीस बाबर
इक ख़ौफ़-ज़दा सा शख़्स घर तक
इदरीस बाबर
धूल उड़ती है तो याद आता है कुछ
इदरीस बाबर
दर्द का दिल का शाम का बज़्म का मय का जाम का
इदरीस बाबर
आज तो जैसे दिन के साथ दिल भी ग़ुरूब हो गया
इदरीस बाबर
यहाँ से चारों तरफ़ रास्ते निकलते हैं
इदरीस बाबर
वो शहर इत्तिफ़ाक़ से नहीं मिला
इदरीस बाबर
वो गुल वो ख़्वाब-शार भी नहीं रहा
इदरीस बाबर
तिरी गली से गुज़रने को सर झुकाए हुए
इदरीस बाबर
रब्त असीरों को अभी उस गुल-ए-तर से कम है
इदरीस बाबर
मतला ग़ज़ल का ग़ैर ज़रूरी क्या क्यूँ कब का हिस्सा है
इदरीस बाबर
मैं उसे सोचता रहा या'नी
इदरीस बाबर
मैं कुछ दिनों में उसे छोड़ जाने वाला था
इदरीस बाबर
किसी के हाथ कहाँ ये ख़ज़ाना आता है
इदरीस बाबर