Sad Poetry (page 25)

इक अख़्गर-ए-जमाल फ़रोज़ाँ ब-शक्ल-ए-दिल

इज्तिबा रिज़वी

दिल है और ख़ुद नगरी ज़ौक़-ए-दुआ जिस को कहें

इज्तिबा रिज़वी

चुराने को चुरा लाया मैं जल्वे रू-ए-रौशन से

इज्तिबा रिज़वी

सब तरह के हालात को इम्कान में रक्खा

इफ्तिखार शफ़ी

वो कहते हैं कि 'राग़िब' तुम नहीं रखते ख़याल अपना

इफ़्तिख़ार राग़िब

'राग़िब' वो मेरी फ़िक्र में ख़ुद को भी भूल जाएँ

इफ़्तिख़ार राग़िब

क्या बताऊँ दिल में किस की याद का

इफ़्तिख़ार राग़िब

एक मौसम की कसक है दिल में दफ़्न

इफ़्तिख़ार राग़िब

वो कहते हैं कि आँखों में मिरी तस्वीर किस की है

इफ़्तिख़ार राग़िब

तर्क-ए-तअल्लुक़ात नहीं चाहता था मैं

इफ़्तिख़ार राग़िब

फिर उठाया जाऊँगा मिट्टी में मिल जाने के बाद

इफ़्तिख़ार राग़िब

मुज़्तरिब आप के बिना है जी

इफ़्तिख़ार राग़िब

जी चाहता है जीना जज़्बात के मुताबिक़

इफ़्तिख़ार राग़िब

हो चराग़-ए-इल्म रौशन ठीक से

इफ़्तिख़ार राग़िब

इक बड़ी जंग लड़ रहा हूँ

इफ़्तिख़ार राग़िब

दिन में आने लगे हैं ख़्वाब मुझे

इफ़्तिख़ार राग़िब

दिल से जब आह निकल जाएगी

इफ़्तिख़ार राग़िब

छोड़ा न मुझे दिल ने मिरी जान कहीं का

इफ़्तिख़ार राग़िब

चाहतों का सिलसिला है मुस्तक़िल

इफ़्तिख़ार राग़िब

अच्छे दिनों की आस लगा कर मैं ने ख़ुद को रोका है

इफ़्तिख़ार राग़िब

मिरी आँखों को आँखों का किनारा कौन देगा

इफ़्तिख़ार क़ैसर

जी में ठानी है कि जीना है बहर-हाल मुझे

इफ़्तिख़ार नसीम

एक मुख़्तलिफ़ कहानी

इफ़्तिख़ार नसीम

तेरी आँखों की चमक बस और इक पल है अभी

इफ़्तिख़ार नसीम

सूरज नए बरस का मुझे जैसे डस गया

इफ़्तिख़ार नसीम

शाम से तन्हा खड़ा हूँ यास का पैकर हूँ मैं

इफ़्तिख़ार नसीम

सज़ा ही दी है दुआओं में भी असर दे कर

इफ़्तिख़ार नसीम

न जाने कब वो पलट आएँ दर खुला रखना

इफ़्तिख़ार नसीम

मिरे नुक़ूश तिरे ज़ेहन से मिटा देगा

इफ़्तिख़ार नसीम

किसी के हक़ में सही फ़ैसला हुआ तो है

इफ़्तिख़ार नसीम