Sad Poetry (page 23)

अब मरना है अपने ख़ुशी है जीने से बे-ज़ारी है

इमदाद अली बहर

आश्ना कोई बा-वफ़ा न मिला

इमदाद अली बहर

उस पर ही भेजता है वो आफ़त भी मौत भी

इम्दाद आकाश

ने आदमी पसंद न इस को ख़ुदा पसंद

इम्दाद आकाश

लम्हा मिरी गिरफ़्त में आया निकल गया

इम्दाद आकाश

तमाम उम्र यूँ ही हो गई बसर अपनी

इमाम बख़्श नासिख़

रश्क से नाम नहीं लेते कि सुन ले न कोई

इमाम बख़्श नासिख़

ख़्वाब ही में नज़र आ जाए शब-ए-हिज्र कहीं

इमाम बख़्श नासिख़

फ़ुर्क़त क़ुबूल रश्क के सदमे नहीं क़ुबूल

इमाम बख़्श नासिख़

यारों की हम से दिल-शिकनी हो सके कहाँ

इमाम बख़्श नासिख़

तू ने महजूर कर दिया हम को

इमाम बख़्श नासिख़

सौ क़िस्सों से बेहतर है कहानी मिरे दिल की

इमाम बख़्श नासिख़

सनम कूचा तिरा है और मैं हूँ

इमाम बख़्श नासिख़

रिफ़अत कभी किसी की गवारा यहाँ नहीं

इमाम बख़्श नासिख़

कौन सा तन है कि मिस्ल-ए-रूह इस में तू नहीं

इमाम बख़्श नासिख़

आ गया जब से नज़र वो शोख़ हरजाई मुझे

इमाम बख़्श नासिख़

किसी की बात कोई बद-गुमाँ न समझेगा

इमाम अाज़म

जो मज़े आज तिरे ग़म के अज़ाबों में मिले

इमाम अाज़म

राखी बंधन

इमाम अाज़म

तुम्हारे जाते ही हर चश्म-ए-तर को देखते हैं

इमाम अाज़म

टिमटिमाता हुआ मंदिर का दिया हो जैसे

इमाम अाज़म

क़द बढ़ाने के लिए बौनों की बस्ती में चलो

इमाम अाज़म

मौसम सूखा सूखा सा था लेकिन ये क्या बात हुई

इमाम अाज़म

किसी की बात कोई बद-गुमाँ न समझेगा

इमाम अाज़म

जो मज़े आज तिरे ग़म के अज़ाबों में मिले

इमाम अाज़म

जाने वाले इतना बता दो फिर तुम कब तक आओगे

इमाम अाज़म

वक़्त आया तो ख़ून से अपने दाग़-ए-नदामत धो लेंगे

इलियास इश्क़ी

ये बहार वो है जहाँ रही असर-ए-ख़िज़ाँ से बरी रही

इलियास इश्क़ी

वक़्त वक़्त की बात है या दस्तूर है दुनिया का साईं

इलियास इश्क़ी

समझाने वालों ने कितना उन को समझाया लोगो

इलियास इश्क़ी