Sad Poetry (page 22)
महबूब-ए-ख़ुदा ने तुझे नायाब बनाया
इमदाद अली बहर
ख़ुर्शीद-रुख़ों का सामना है
इमदाद अली बहर
ख़ुर्शीद फ़िराक़ में तपाँ है
इमदाद अली बहर
ख़ुदा-परस्त हुए हम न बुत-परस्त हुए
इमदाद अली बहर
ख़ूब-रू सब हैं मगर हूरा-शमाइल एक है
इमदाद अली बहर
कभी तो देखे हमारी अरक़-फ़िशानी धूप
इमदाद अली बहर
जिस को चाहो तुम उस को भर दो
इमदाद अली बहर
जाते है ख़ानक़ाह से वाइज़ सलाम है
इमदाद अली बहर
जल्वा-ए-अर्बाब-ए-दुनिया देखिए
इमदाद अली बहर
जब कि सर पर वबाल आता है
इमदाद अली बहर
इस तरह ज़ीस्त बसर की कोई पुरसाँ न हुआ
इमदाद अली बहर
इफ़्शा हुए असरार-ए-जुनूँ जामा-दरी से
इमदाद अली बहर
हम ख़िज़ाँ की अगर ख़बर रखते
इमदाद अली बहर
हर तरफ़ मज्मा-ए-आशिक़ाँ है
इमदाद अली बहर
हम-ज़ाद है ग़म अपना शादाँ किसे कहते हैं
इमदाद अली बहर
हमीं नाशाद नज़र आते हैं दिल-शाद हैं सब
इमदाद अली बहर
गर्दिश-ए-चर्ख़ से क़याम नहीं
इमदाद अली बहर
फ़ुर्क़त की आफ़त बुरे दिन काटना साल है
इमदाद अली बहर
दुपट्टा वो गुलनार दिखला गए
इमदाद अली बहर
दोस्तो दिल कहीं ज़िन्हार न आने पाए
इमदाद अली बहर
दम-ए-मर्ग बालीं पर आया तो होता
इमदाद अली बहर
दाग़ बैआ'ना हुस्न का न हुआ
इमदाद अली बहर
चूर सदमों से हो बईद नहीं
इमदाद अली बहर
चुनने न दिया एक मुझे लाख झड़े फूल
इमदाद अली बहर
चार दिन है ये जवानी न बहुत जोश में आ
इमदाद अली बहर
बोलिए करता हूँ मिन्नत आप की
इमदाद अली बहर
बशर रोज़-ए-अज़ल से शेफ़्ता है शान-ओ-शौकत का
इमदाद अली बहर
बद-तालई का इलाज क्या हो
इमदाद अली बहर
ऐसी कोयल न पपीहे की है प्यारी आवाज़
इमदाद अली बहर
ऐसे पुर-नूर-ओ-ज़िया यार के रुख़्सारे हैं
इमदाद अली बहर