Sad Poetry (page 20)
आसमाँ मिल न सका धरती पे आया न गया
इमरान हुसैन आज़ाद
परिंदा आइने से क्या लड़ेगा
इमरान आमी
कुछ एहतिमाम न था शाम-ए-ग़म मनाने को
इमरान आमी
कोई मेरा इमाम था ही नहीं
इमरान आमी
इस दश्त से आगे भी कोई दश्त-ए-गुमाँ है
इमरान आमी
हम-साए में शैतान भी रहता है ख़ुदा भी
इमरान आमी
एहतियातन उसे छुआ नहीं है
इमरान आमी
आख़िर इक दिन सब को मरना होता है
इमरान आमी
रात चराग़ की महफ़िल में शामिल एक ज़माना था
इमदाद निज़ामी
पा रहा है दिल मुसीबत के मज़े
इम्दाद इमाम असर
ख़ुदा जाने 'असर' को क्या हुआ है
इम्दाद इमाम असर
ख़ूब-ओ-ज़िश्त-ए-जहाँ का फ़र्क़ न पूछ
इम्दाद इमाम असर
बनाते हैं हज़ारों ज़ख़्म-ए-ख़ंदाँ ख़ंजर-ए-ग़म से
इम्दाद इमाम असर
ज़बान-ए-हाल से हम शिकवा-ए-बेदाद करते हैं
इम्दाद इमाम असर
तेरी जानिब से मुझ पे क्या न हुआ
इम्दाद इमाम असर
सूली चढ़े जो यार के क़द पर फ़िदा न हो
इम्दाद इमाम असर
सुब्ह-दम रोती जो तेरी बज़्म से जाती है शम्अ
इम्दाद इमाम असर
रोते हैं सुन के कहानी मेरी
इम्दाद इमाम असर
क़ैद-ए-तन से रूह है नाशाद क्या
इम्दाद इमाम असर
मेरे सर में जो रात चक्कर था
इम्दाद इमाम असर
महफ़िल में उस पे रात जो तू मेहरबाँ न था
इम्दाद इमाम असर
क्यूँ देखिए न हुस्न-ए-ख़ुदा-दाद की तरफ़
इम्दाद इमाम असर
किसी का दिल को रहा इंतिज़ार सारी रात
इम्दाद इमाम असर
झूटे वादों पर तुम्हारी जाएँ क्या
इम्दाद इमाम असर
जफ़ाएँ होती हैं घुटता है दम ऐसा भी होता है
इम्दाद इमाम असर
हुस्न की जिंस ख़रीदार लिए फिरती है
इम्दाद इमाम असर
ग़म नहीं मुझ को जो वक़्त-ए-इम्तिहाँ मारा गया
इम्दाद इमाम असर
दिल से क्या पूछता है ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर से पूछ
इम्दाद इमाम असर
दिल संग नहीं है कि सितमगर न भर आता
इम्दाद इमाम असर
बहे साथ अश्क के लख़्त-ए-जिगर तक
इम्दाद इमाम असर