Sad Poetry (page 267)
मैं ने सोचा है रात-भर तुम को
अंबरीन हसीब अंबर
मैं उसे देख रही हूँ बड़ी हैरानी से
अंबरीन हसीब अंबर
कब मौसम-ए-बहार पुकारा नहीं किया
अंबरीन हसीब अंबर
जब से ज़िंदगी हुआ दिल गर्दिश-ए-तक़दीर का
अंबरीन हसीब अंबर
हो गई बात पुरानी फिर भी
अंबरीन हसीब अंबर
बहते हुए अश्कों की रवानी नहीं लिक्खी
अंबरीन हसीब अंबर
साएबाँ क्या अब्र का टुकड़ा है क्या
अम्बर शमीम
कोई दीवार न दर बाक़ी है
अम्बर शमीम
ज़माने-भर से जुदा और बा-कमाल कोई
अम्बर खरबंदा
मुश्किल को समझने का वसीला निकल आता
अम्बर खरबंदा
जहाँ में हर बशर मजबूर हो ऐसा नहीं होता
अम्बर खरबंदा
हर इक रिश्ता बिखरा बिखरा क्यूँ लगता है
अम्बर खरबंदा
मेरा कर्ब मिरी तन्हाई की ज़ीनत
अम्बर बहराईची
युधिष्ठिर
अम्बर बहराईची
मुझे ख़बर है मुझे यक़ीं है
अम्बर बहराईची
इम्बिसात-ए-अज़ली
अम्बर बहराईची
हम ख़्वाब-ज़दा
अम्बर बहराईची
एक रियाज़त ये भी
अम्बर बहराईची
धनक
अम्बर बहराईची
वो लम्हा मुझ को शश्दर कर गया था
अम्बर बहराईची
शब ख़्वाब के जज़ीरों में हँस कर गुज़र गई
अम्बर बहराईची
मिरे चेहरे पे जो आँसू गिरा था
अम्बर बहराईची
मैं अपनी वुसअतों को उस गली में भूल जाता हूँ
अम्बर बहराईची
क्यूँ न हों शाद कि हम राहगुज़र में हैं अभी
अम्बर बहराईची
जलते हुए जंगल से गुज़रना था हमें भी
अम्बर बहराईची
हर तरफ़ उस के सुनहरे लफ़्ज़ हैं फैले हुए
अम्बर बहराईची
हर लम्हा सैराबी की अर्ज़ानी है
अम्बर बहराईची
गीली मिट्टी हाथ में ले कर बैठा हूँ
अम्बर बहराईची
बुरीदा बाज़ुओं में वो परिंद लाला-बार था
अम्बर बहराईची
आज फिर धूप की शिद्दत ने बड़ा काम किया
अम्बर बहराईची