Sad Poetry (page 269)
मेडिकल टेस्ट
अल्ताफ़ हुसैन हाली
मर्सिया-ए-देहली-ए-मरहूम
अल्ताफ़ हुसैन हाली
हुब्ब-ए-वतन
अल्ताफ़ हुसैन हाली
बरखा-रुत
अल्ताफ़ हुसैन हाली
उस के जाते ही ये क्या हो गई घर की सूरत
अल्ताफ़ हुसैन हाली
रंज और रंज भी तन्हाई का
अल्ताफ़ हुसैन हाली
कोई महरम नहीं मिलता जहाँ में
अल्ताफ़ हुसैन हाली
ख़ूबियाँ अपने में गो बे-इंतिहा पाते हैं हम
अल्ताफ़ हुसैन हाली
कर के बीमार दी दवा तू ने
अल्ताफ़ हुसैन हाली
कह दो कोई साक़ी से कि हम मरते हैं प्यासे
अल्ताफ़ हुसैन हाली
जुनूँ कार-फ़रमा हुआ चाहता है
अल्ताफ़ हुसैन हाली
जीते जी मौत के तुम मुँह में न जाना हरगिज़
अल्ताफ़ हुसैन हाली
हश्र तक याँ दिल शकेबा चाहिए
अल्ताफ़ हुसैन हाली
हक़ीक़त महरम-ए-असरार से पूछ
अल्ताफ़ हुसैन हाली
हक़ वफ़ा के जो हम जताने लगे
अल्ताफ़ हुसैन हाली
है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूब-तर कहाँ
अल्ताफ़ हुसैन हाली
गो जवानी में थी कज-राई बहुत
अल्ताफ़ हुसैन हाली
ग़म-ए-फ़ुर्क़त ही में मरना हो तो दुश्वार नहीं
अल्ताफ़ हुसैन हाली
दिल से ख़याल-ए-दोस्त भुलाया न जाएगा
अल्ताफ़ हुसैन हाली
दिल को दर्द-आश्ना किया तू ने
अल्ताफ़ हुसैन हाली
धूम थी अपनी पारसाई की
अल्ताफ़ हुसैन हाली
बात कुछ हम से बन न आई आज
अल्ताफ़ हुसैन हाली
अब वो अगला सा इल्तिफ़ात नहीं
अल्ताफ़ हुसैन हाली
रात सुब्ह-ए-बहार होगी
अल्ताफ़ अहमद कुरेशी
वो मसाफ़-ए-जीस्त में हर मोड़ पर तन्हा रहा
अलक़मा शिबली
दश्त-दर-दश्त फिरा करता हूँ प्यासा हूँ मैं
अलक़मा शिबली
मिरे लिए हैं मुसीबत ये आइना-ख़ाने
आलोक यादव
सब्ज़ है पैरहन चाँद का आज फिर
आलोक यादव
मिरी क़ुर्बतों की ख़ातिर यूँही बे-क़रार होता
आलोक यादव
खुला है ज़ीस्त का इक ख़ुशनुमा वरक़ फिर से
आलोक यादव