Sad Poetry (page 271)
लगे जब सुबह की कश्ती किनारे शब
अलमास शबी
ग़म हँसी में छुपा दिया होगा
अलमास शबी
वतन की फ़िक्र कर नादाँ मुसीबत आने वाली है
अल्लामा इक़बाल
तमन्ना दर्द-ए-दिल की हो तो कर ख़िदमत फ़क़ीरों की
अल्लामा इक़बाल
नहीं इस खुली फ़ज़ा में कोई गोशा-ए-फ़राग़त
अल्लामा इक़बाल
नहीं है ना-उमीद 'इक़बाल' अपनी किश्त-ए-वीराँ से
अल्लामा इक़बाल
माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं
अल्लामा इक़बाल
कभी छोड़ी हुई मंज़िल भी याद आती है राही को
अल्लामा इक़बाल
हैं उक़्दा-कुशा ये ख़ार-ए-सहरा
अल्लामा इक़बाल
गुलज़ार-ए-हस्त-ओ-बूद न बेगाना-वार देख
अल्लामा इक़बाल
बाग़-ए-बहिश्त से मुझे हुक्म-ए-सफ़र दिया था क्यूँ
अल्लामा इक़बाल
अज़ाब-ए-दानिश-ए-हाज़िर से बा-ख़बर हूँ मैं
अल्लामा इक़बाल
ऐ ताइर-ए-लाहूती उस रिज़्क़ से मौत अच्छी
अल्लामा इक़बाल
अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल
अल्लामा इक़बाल
ज़ोहद और रिंदी
अल्लामा इक़बाल
ज़ौक़ ओ शौक़
अल्लामा इक़बाल
वालिदा मरहूमा की याद में
अल्लामा इक़बाल
तुलू-ए-इस्लाम
अल्लामा इक़बाल
तस्वीर-ए-दर्द
अल्लामा इक़बाल
तारिक़ की दुआ
अल्लामा इक़बाल
तराना-ए-मिल्ली
अल्लामा इक़बाल
तराना-ए-हिन्दी
अल्लामा इक़बाल
शिकवा
अल्लामा इक़बाल
साक़ी-नामा
अल्लामा इक़बाल
रूह-ए-अर्ज़ी आदम का इस्तिक़बाल करती है
अल्लामा इक़बाल
राम
अल्लामा इक़बाल
नानक
अल्लामा इक़बाल
नाला-ए-फ़िराक़
अल्लामा इक़बाल
मोहब्बत
अल्लामा इक़बाल
मिर्ज़ा 'ग़ालिब'
अल्लामा इक़बाल