Sad Poetry (page 273)
निगाह-ए-फ़क़्र में शान-ए-सिकंदरी क्या है
अल्लामा इक़बाल
न हो तुग़्यान-ए-मुश्ताक़ी तो मैं रहता नहीं बाक़ी
अल्लामा इक़बाल
मुझे आह-ओ-फ़ुग़ान-ए-नीम-शब का फिर पयाम आया
अल्लामा इक़बाल
मिटा दिया मिरे साक़ी ने आलम-ए-मन-ओ-तू
अल्लामा इक़बाल
मीर-ए-सिपाह ना-सज़ा लश्करियाँ शिकस्ता सफ़
अल्लामा इक़बाल
मता-ए-बे-बहा है दर्द-ओ-सोज़-ए-आरज़ूमंदी
अल्लामा इक़बाल
मजनूँ ने शहर छोड़ा तो सहरा भी छोड़ दे
अल्लामा इक़बाल
कुशादा दस्त-ए-करम जब वो बे-नियाज़ करे
अल्लामा इक़बाल
ख़ुदी हो इल्म से मोहकम तो ग़ैरत-ए-जिब्रील
अल्लामा इक़बाल
ख़िर्द-मंदों से क्या पूछूँ कि मेरी इब्तिदा क्या है
अल्लामा इक़बाल
ख़िरद ने मुझ को अता की नज़र हकीमाना
अल्लामा इक़बाल
करेंगे अहल-ए-नज़र ताज़ा बस्तियाँ आबाद
अल्लामा इक़बाल
कमाल-ए-तर्क नहीं आब-ओ-गिल से महजूरी
अल्लामा इक़बाल
कभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़र नज़र आ लिबास-ए-मजाज़ में
अल्लामा इक़बाल
जब इश्क़ सिखाता है आदाब-ए-ख़ुद-आगाही
अल्लामा इक़बाल
इश्क़ से पैदा नवा-ए-ज़िंदगी में ज़ेर-ओ-बम
अल्लामा इक़बाल
हज़ार ख़ौफ़ हो लेकिन ज़बाँ हो दिल की रफ़ीक़
अल्लामा इक़बाल
हर चीज़ है महव-ए-ख़ुद-नुमाई
अल्लामा इक़बाल
है याद मुझे नुक्ता-ए-सलमान-ए-ख़ुश-आहंग
अल्लामा इक़बाल
गुलज़ार-ए-हस्त-ओ-बूद न बेगाना-वार देख
अल्लामा इक़बाल
गेसू-ए-ताबदार को और भी ताबदार कर
अल्लामा इक़बाल
दिल-ए-बेदार फ़ारूक़ी दिल-ए-बेदार कर्रारी
अल्लामा इक़बाल
दिगर-गूँ है जहाँ तारों की गर्दिश तेज़ है साक़ी
अल्लामा इक़बाल
असर करे न करे सुन तो ले मिरी फ़रियाद
अल्लामा इक़बाल
अक़्ल गो आस्ताँ से दूर नहीं
अल्लामा इक़बाल
अपनी जौलाँ-गाह ज़ेर-ए-आसमाँ समझा था मैं
अल्लामा इक़बाल
अनोखी वज़्अ' है सारे ज़माने से निराले हैं
अल्लामा इक़बाल
अगर कज-रौ हैं अंजुम आसमाँ तेरा है या मेरा
अल्लामा इक़बाल
आलम-ए-आब-ओ-ख़ाक-ओ-बाद सिर्र-ए-अयाँ है तू कि मैं
अल्लामा इक़बाल
ग़म तेरा मुझे जाँ से गुज़रने नहीं देता
आल इमरान