Sad Poetry (page 274)

एहसास देख पाए वो मंज़र तलाश कर

अलीउद्दीन नवेद

उस का ग़म अपनी तलब छीन के ले जाएगा

अलीमुल्लाह हाली

सफ़र है ज़ेहन का तो कोई रहनुमा ले जा

अलीमुल्लाह हाली

सदाओं के जंगल में वो ख़ामुशी है

अलीमुल्लाह हाली

ना-शनासी का हमेशा ग़म रहा

अलीमुल्लाह हाली

जुदा किया तो बहुत ही हँसी-ख़ुशी उस ने

अलीमुल्लाह हाली

है ग़म-ए-हिज्र न अब ज़ौक़-ए-तलब कुछ भी नहीं

अलीमुल्लाह हाली

बादलों के बीच था मैं बे-सर-ओ-सामाँ न था

अलीमुल्लाह हाली

यार के दरसन के ख़ातिर जान और तन भूल जा

अलीमुल्लाह

तू है किस मंज़िल में तेरा बोल खाँ है दिल का ठार

अलीमुल्लाह

राह में हक़ के अज़ीज़ाँ आप को क़ुर्बां करो

अलीमुल्लाह

नूर-ए-हक़ बे-हिजाब इश्क़-अल्लाह

अलीमुल्लाह

नको नसीहत करो अज़ीज़ाँ निगा है हमना मुहन सूँ मीता

अलीमुल्लाह

मुर्ग़ ज़ीरक अक़्ल का है इश्क़ का सय्याद शोख़

अलीमुल्लाह

ला-मकाँ लग आशिक़ाँ के इश्क़ का पर्वाज़ है

अलीमुल्लाह

कीता कहीं पुकार ऐ ग़ाफ़िल बिया बिया

अलीमुल्लाह

ख़यालात रंगीं नहीं बोलते उस को ज्यूँ बास फूलों के रंगों में रहिए

अलीमुल्लाह

हुस्न का देख हर तरफ़ गुलज़ार

अलीमुल्लाह

ग़फ़लत में सोया अब तिलक फिर होवेगा होश्यार कब

अलीमुल्लाह

दिलबर को दिलबरी सूँ मना यार कर रखूँ

अलीमुल्लाह

अक़्ल-ए-जुज़वी छोड़ कर ऐ यार फ़िक्र-ए-कुल करो

अलीमुल्लाह

अपने से बे-समझ को हक़ की कहाँ पछानत

अलीमुल्लाह

अजब चंचल मिला है यार हमना

अलीमुल्लाह

सुकूत-ए-शाम का हिस्सा तू मत बना मुझ को

अली ज़रयून

सुकूत-ए-शाम का हिस्सा तू मत बना मुझ को

अली ज़रयून

अदा-ए-इश्क़ हूँ पूरी अना के साथ हूँ मैं

अली ज़रयून

राज़-ए-ग़म-ए-उल्फ़त को ये दुनिया न समझ ले

अली ज़हीर लखनवी

काला समुंदर

अली ज़हीर लखनवी

एक रात एक सुब्ह

अली ज़हीर लखनवी

एक पलटता हुआ मंज़र

अली ज़हीर लखनवी