Sad Poetry (page 279)
ग़ैर पूछें भी तो हम क्या अपना अफ़्साना कहें
अली जव्वाद ज़ैदी
इक आह-ए-ज़ेर-ए-लब के गुनहगार हो गए
अली जव्वाद ज़ैदी
इक आह-ए-ज़ेर-ए-लब के गुनहगार हो गए
अली जव्वाद ज़ैदी
दीन ओ दिल पहली ही मंज़िल में यहाँ काम आए
अली जव्वाद ज़ैदी
दबी आवाज़ में करती थी कल शिकवे ज़मीं मुझ से
अली जव्वाद ज़ैदी
ऐश ही ऐश है न सब ग़म है
अली जव्वाद ज़ैदी
आँखों में अश्क भर के मुझ से नज़र मिला के
अली जव्वाद ज़ैदी
आँख कुछ बे-सबब ही नम तो नहीं
अली जव्वाद ज़ैदी
उलझन
अली इमरान
नॉस्टेलजिया
अली इमरान
मेड फॉर ईच-अदर
अली इमरान
ग़ुंडा
अली इमरान
सर्कस
अली इमरान
16 दिसम्बर आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमला
अली इमरान
तिरे वस्ल पे तेरी क़ुर्बत पे ला'नत
अली इमरान
पूछते हो तुम मैं कब कर के दिखलाऊँगा
अली इमरान
दिल में चलती हुई जंगों से निकल आऊँगा
अली इमरान
अब कोई ग़म ही नहीं है जो रुलाए मुझ को
अली इमरान
तुम किसी संग पे अब सर को टिका कर सो जाओ
अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री
किसी की आँख का तारा हुआ करते थे हम भी तो
अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री
चमन में वो फ़रामोशी का मौसम था मैं ख़ुद को भी
अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री
बर-सर-ए-बाद हुआ अपना ठिकाना सर-ए-राह
अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री
याद इक दरीचा है
अली असग़र अब्बास
ख़्वाब इक परिंदा है
अली असग़र अब्बास
सन्नाटा
अली असग़र
फ़रेब-ए-जल्वा कहाँ तक ब-रू-ए-कार रहे
अली अख़्तर अख़्तर
दिल की आरज़ू थी दर्द दर्द-ए-बे-दवा पाया
अली अख़्तर अख़्तर
मुख़्तसर बात थी, फैली क्यूँ सबा की मानिंद
अली अकबर नातिक़
उठेंगे मौत से पहले
अली अकबर नातिक़
सुर्मा हो या तारा
अली अकबर नातिक़