Sad Poetry (page 278)

मोनिस-ए-शब रफ़ीक़-ए-तन्हाई

अली जव्वाद ज़ैदी

मिरे हाथ सुलझा ही लेंगे किसी दिन

अली जव्वाद ज़ैदी

लज़्ज़त-ए-दर्द मिली इशरत-ए-एहसास मिली

अली जव्वाद ज़ैदी

हम अहल-ए-दिल ने मेयार-ए-मोहब्बत भी बदल डाले

अली जव्वाद ज़ैदी

हिज्र की रात ये हर डूबते तारे ने कहा

अली जव्वाद ज़ैदी

एक तुम्हारी याद ने लाख दिए जलाए हैं

अली जव्वाद ज़ैदी

दिल में जो दर्द है वो निगाहों से है अयाँ

अली जव्वाद ज़ैदी

दिल का लहू निगाह से टपका है बार-हा

अली जव्वाद ज़ैदी

दिखा दी मैं ने वो मंज़िल जो इन दोनों के आगे है

अली जव्वाद ज़ैदी

ऐश ही ऐश है न सब ग़म है

अली जव्वाद ज़ैदी

अब दर्द में वो कैफ़ियत-ए-दर्द नहीं है

अली जव्वाद ज़ैदी

होली

अली जव्वाद ज़ैदी

भूलती हुई याद

अली जव्वाद ज़ैदी

ज़ुल्मत-कदों में कल जो शुआ-ए-सहर गई

अली जव्वाद ज़ैदी

ज़र्रा-ए-ना-तापीदा की ख़्वाहिश-ए-आफ़ताब क्या

अली जव्वाद ज़ैदी

उफ़ वो इक हर्फ़-ए-तमन्ना जो हमारे दिल में था

अली जव्वाद ज़ैदी

तेरे हल्के से तबस्सुम का इशारा भी तो हो

अली जव्वाद ज़ैदी

तिरे दयार में कोई ग़म-आश्ना तो नहीं

अली जव्वाद ज़ैदी

तय कर चुके ये ज़िंदगी-ए-जावेदाँ से हम

अली जव्वाद ज़ैदी

शिकवे हम अपनी ज़बाँ पर कभी लाए तो नहीं

अली जव्वाद ज़ैदी

नींद आ गई थी मंज़िल-ए-इरफ़ाँ से गुज़र के

अली जव्वाद ज़ैदी

नया मय-कदे में निज़ाम आ गया

अली जव्वाद ज़ैदी

मंज़िल-ए-दिल मिली कहाँ ख़त्म-ए-सफ़र के बाद भी

अली जव्वाद ज़ैदी

कम-ज़र्फ़ एहतियात की मंज़िल से आए हैं

अली जव्वाद ज़ैदी

जुनूँ से राह-ए-ख़िरद में भी काम लेना था

अली जव्वाद ज़ैदी

जो मक़्सद गिर्या-ए-पैहम का है वो हम समझते हैं

अली जव्वाद ज़ैदी

जवानी हरीफ़-ए-सितम है तो क्या ग़म

अली जव्वाद ज़ैदी

हम-सफ़र गुम रास्ते ना-पैद घबराता हूँ मैं

अली जव्वाद ज़ैदी

है ख़मोश आँसुओं में भी नशात-ए-कामरानी

अली जव्वाद ज़ैदी

गो वसीअ' सहरा में इक हक़ीर ज़र्रा हूँ

अली जव्वाद ज़ैदी