Sad Poetry (page 281)

काटी है ग़म की रात बड़े एहतिराम से

अली अहमद जलीली

ग़म से मंसूब करूँ दर्द का रिश्ता दे दूँ

अली अहमद जलीली

फ़रेब-ए-निकहत-ओ-गुलज़ार से बचाओ मुझे

अली अहमद जलीली

एक खिड़की गली की खुली रात भर

अली अहमद जलीली

आज जलती हुई हर शम्अ बुझा दी जाए

अली अहमद जलीली

वरक़ है मेरे सहीफ़े का आसमाँ क्या है

अली अब्बास उम्मीद

रूह की बात सुने जिस्म के तेवर देखे

अली अब्बास उम्मीद

मैं तो इक लम्हा-ए-परीदा रहा

अली अब्बास उम्मीद

किसी के वास्ते तस्वीर-ए-इंतिज़ार थे हम

अलीना इतरत

शाम की पुरवाई

अलीना इतरत

मुझे तो इंतिज़ार-ए-इश्क़ में ही लुत्फ़ आता है

अलीना इतरत

ज़िंदा रहने की ये तरकीब निकाली मैं ने

अलीना इतरत

सारे मौसम बदल गए शायद

अलीना इतरत

जुनूँ में दामन-ए-दिल गरचे तार तार हुआ

अलीना इतरत

बगूला बन के नाचता हुआ ये तन गुज़र गया

अलीना इतरत

वो अर्ज़-ए-ग़म पे मश्वरा-ए-इख़्तिसार दे

अलीम उस्मानी

वक़्त-ए-आख़िर जो बालीं पर आजाइयो

अलीम उस्मानी

तिरे चाँद जैसे रुख़ पर ये निशान-ए-दर्द क्यूँ हैं

अलीम उस्मानी

मौत आई है ज़माने की तो मर जाने दो

अलीम उस्मानी

मैं नक़्श-हा-ए-ख़ून-ए-वफ़ा छोड़ जाऊँगा

अलीम उस्मानी

जिस दिन से उठ के हम तिरी महफ़िल से आए हैं

अलीम उस्मानी

गर्दिश-ए-मय का इस पर न होगा असर मस्त आँखों का जादू जिसे याद है

अलीम उस्मानी

देती हैं थपकियाँ तिरी परछाइयाँ मुझे

अलीम उस्मानी

बादा-ख़ाने की रिवायत को निभाना चाहिए

अलीम उस्मानी

तेरे जमाल की दोशीज़गी की क़ौस-ए-क़ुज़ह

अलीम सबा नवेदी

सिसकता चीख़ता एहसास था मिरे अंदर

अलीम सबा नवेदी

नाज़िल हुआ था शहर में काला अज़ाब एक

अलीम सबा नवेदी

लब क्या खुले कि क़ुव्वत-ए-गोयाई छिन गई

अलीम सबा नवेदी

ख़ुश्क आँखों से लहू फूट के रोना इक दिन

अलीम सबा नवेदी

हर मोड़ पे सफ़र था अजब बोलने न पाए

अलीम सबा नवेदी