Sad Poetry (page 287)
नज़्र-ए-वतन
अख़्तर शीरानी
नन्हा क़ासिद
अख़्तर शीरानी
मुझे ले चल
अख़्तर शीरानी
जहाँ 'रेहाना' रहती थी
अख़्तर शीरानी
एक शाएरा की शादी पर
अख़्तर शीरानी
एक हुस्न-फ़रोश से
अख़्तर शीरानी
दिल-ओ-दिमाग़ को रो लूँगा आह कर लूँगा
अख़्तर शीरानी
दावत
अख़्तर शीरानी
बस्ती की लड़कियों के नाम
अख़्तर शीरानी
बरखा-रुत
अख़्तर शीरानी
बदनाम हो रहा हूँ
अख़्तर शीरानी
अँगूठी
अख़्तर शीरानी
ऐ इश्क़ कहीं ले चल
अख़्तर शीरानी
ऐ इश्क़ हमें बर्बाद न कर
अख़्तर शीरानी
आँसू
अख़्तर शीरानी
ज़मान-ए-हिज्र मिटे दौर-ए-वस्ल-ए-यार आए
अख़्तर शीरानी
यक़ीन-ए-वादा नहीं ताब-ए-इंतिज़ार नहीं
अख़्तर शीरानी
वो कहते हैं रंजिश की बातें भुला दें
अख़्तर शीरानी
वो कभी मिल जाएँ तो क्या कीजिए
अख़्तर शीरानी
वादा उस माह-रू के आने का
अख़्तर शीरानी
उस मह-जबीं से आज मुलाक़ात हो गई
अख़्तर शीरानी
उन रस भरी आँखों में हया खेल रही है
अख़्तर शीरानी
उन को बुलाएँ और वो न आएँ तो क्या करें
अख़्तर शीरानी
उम्र भर की तल्ख़ बेदारी का सामाँ हो गईं
अख़्तर शीरानी
तमन्नाओं को ज़िंदा आरज़ूओं को जवाँ कर लूँ
अख़्तर शीरानी
सू-ए-कलकत्ता जो हम ब-दिल-ए-दीवाना चले
अख़्तर शीरानी
निकहत-ए-ज़ुल्फ़ से नींदों को बसा दे आ कर
अख़्तर शीरानी
न भूल कर भी तमन्ना-ए-रंग-ओ-बू करते
अख़्तर शीरानी
मोहब्बत की दुनिया में मशहूर कर दूँ
अख़्तर शीरानी
मिरी शाम-ए-ग़म को वो बहला रहे हैं
अख़्तर शीरानी