Sad Poetry (page 285)
मताअ-ए-राएगाँ
अख़्तर-उल-ईमान
मस्जिद
अख़्तर-उल-ईमान
काविश
अख़्तर-उल-ईमान
काले सफ़ेद परों वाला परिंदा और मेरी एक शाम
अख़्तर-उल-ईमान
इत्तिफ़ाक़
अख़्तर-उल-ईमान
फ़ासला
अख़्तर-उल-ईमान
एक एहसास
अख़्तर-उल-ईमान
दूर की आवाज़
अख़्तर-उल-ईमान
डासना स्टेशन का मुसाफ़िर
अख़्तर-उल-ईमान
बिंत-ए-लम्हात
अख़्तर-उल-ईमान
बे-तअल्लुक़ी
अख़्तर-उल-ईमान
बे-चारगी
अख़्तर-उल-ईमान
अपाहिज गाड़ी का आदमी
अख़्तर-उल-ईमान
आख़िरी मुलाक़ात
अख़्तर-उल-ईमान
कोई इलाज-ए-ग़म-ए-ज़िंदगी बता वाइज़
अख़्तर ज़ियाई
ग़म का आहंग है
अख़्तर ज़ियाई
आईना देखता हूँ
अख़्तर ज़ियाई
वो कम-नसीब जो अहद-ए-जफ़ा में रहते हैं
अख़्तर ज़ियाई
मिला जो कोई यहाँ रम्ज़-आशना न मुझे
अख़्तर ज़ियाई
इरफ़ान-ओ-आगही के सज़ा-वार हम हुए
अख़्तर ज़ियाई
दिन ढला शब हुई चराग़ जले
अख़्तर ज़ियाई
अहद-ए-वफ़ा का क़र्ज़ अदा कर दिया गया
अख़्तर ज़ियाई
आँख दरिया जिगर लहू करना
अख़्तर ज़ियाई
शाम
अख़्तर उस्मान
गर्द-बाद
अख़्तर उस्मान
बुत-साज़
अख़्तर उस्मान
तेरा हर राज़ छुपाए हुए बैठा है कोई
अख़्तर सिद्दीक़ी
तू ने एक उम्र के बाद पूछा है हाल-ए-दिल
अख्तर शुमार
मैं तो इस वास्ते चुप हूँ कि तमाशा न बने
अख्तर शुमार
अभी सफ़र में कोई मोड़ ही नहीं आया
अख्तर शुमार