Sad Poetry (page 284)
लहू तेज़ाब करना चाहता है
अकरम नक़्क़ाश
कुछ फ़ासला नहीं है अदू और शिकस्त में
अकरम नक़्क़ाश
कोई सुनता ही नहीं किस को सुनाने लग जाएँ
अकरम नक़्क़ाश
कोई इल्ज़ाम मेरे नाम मेरे सर नहीं आया
अकरम नक़्क़ाश
हैरत से देखता हुआ चेहरा किया मुझे
अकरम नक़्क़ाश
हैरत के दफ़्तर जाऊँ
अकरम नक़्क़ाश
हब्स-ए-दरूँ पे जिस्म-ए-गिराँ-बार संग था
अकरम नक़्क़ाश
गहरी सूनी राह और तन्हा सा मैं
अकरम नक़्क़ाश
दश्त को ढूँडने निकलूँ तो जज़ीरा निकले
अकरम नक़्क़ाश
ब-रंग-ए-ख़्वाब मैं बिखरा रहूँगा
अकरम नक़्क़ाश
ऐ अब्र-ए-इल्तिफ़ात तिरा ए'तिबार फिर
अकरम नक़्क़ाश
सितारा आँख में दिल में गुलाब क्या रखना
अकरम महमूद
कोई हुनर तो मिरी चश्म-ए-अश्क-बार में है
अकरम महमूद
अगर हर चीज़ में उस ने असर रक्खा हुआ है
अकरम महमूद
अब दिल भी दुखाओ तो अज़िय्यत नहीं होती
अकरम महमूद
ज़िंदगी तेरे अजब ठोर-ठिकाने निकले
अकमल इमाम
जब से क़िस्तों में बट गया हूँ मैं
अकमल इमाम
हिज्र की शाम से ज़ख़्मों के दोशाले माँगूँ
अकमल इमाम
गुज़रते दौड़ते लम्हे हिसाब में लिखिए
अकमल इमाम
यादें
अख़्तर-उल-ईमान
तर्ग़ीब और उस के ब'अद
अख़्तर-उल-ईमान
तन्हाई में
अख़्तर-उल-ईमान
सुकून
अख़्तर-उल-ईमान
सिलसिले
अख़्तर-उल-ईमान
शीशा का आदमी
अख़्तर-उल-ईमान
सब्ज़ा-ए-बेगाना
अख़्तर-उल-ईमान
पस-मंज़र
अख़्तर-उल-ईमान
मुकाफ़ात
अख़्तर-उल-ईमान
मुफ़ाहमत
अख़्तर-उल-ईमान
मेरा दोस्त अबुल-हौल
अख़्तर-उल-ईमान