Sad Poetry (page 289)

ये बे-सबब नहीं आए हैं आँख में आँसू

अख़्तर सईद ख़ान

किस को फ़ुर्सत थी कि 'अख़्तर' देखता मेरी तरफ़

अख़्तर सईद ख़ान

दुश्मन-ए-जाँ ही सही साथ तो इक उम्र का है

अख़्तर सईद ख़ान

ज़िंदगी क्या हुए वो अपने ज़माने वाले

अख़्तर सईद ख़ान

ये हम से पूछते हो रंज-ए-इम्तिहाँ क्या है

अख़्तर सईद ख़ान

याद आएँ जो अय्याम-ए-बहाराँ तो किधर जाएँ

अख़्तर सईद ख़ान

तुम से छुट कर ज़िंदगी का नक़्श-ए-पा मिलता नहीं

अख़्तर सईद ख़ान

तुम हो या छेड़ती है याद-ए-सहर कोई तो है

अख़्तर सईद ख़ान

तिरी जबीं पे मिरी सुब्ह का सितारा है

अख़्तर सईद ख़ान

सुन रहा हूँ बे-सदा नग़्मा जो मैं बा-चश्म-ए-तर

अख़्तर सईद ख़ान

सैर-गाह-ए-दुनिया का हासिल-ए-तमाशा क्या

अख़्तर सईद ख़ान

सफ़र ही शर्त-ए-सफ़र है तो ख़त्म क्या होगा

अख़्तर सईद ख़ान

नैरंगी-ए-नशात-ए-तमन्ना अजीब है

अख़्तर सईद ख़ान

मुद्दत से लापता है ख़ुदा जाने क्या हुआ

अख़्तर सईद ख़ान

लब-ए-सुकूत पे इक हर्फ़-ए-बे-नवा भी नहीं

अख़्तर सईद ख़ान

कैसे समझाऊँ नसीम-ए-सुब्ह तुझ को क्या हूँ मैं

अख़्तर सईद ख़ान

कहें किस से हमारा खो गया क्या

अख़्तर सईद ख़ान

कभी ज़बाँ पे न आया कि आरज़ू क्या है

अख़्तर सईद ख़ान

गुज़रना है जी से गुज़र जाइए

अख़्तर सईद ख़ान

दिल-ए-शोरीदा की वहशत नहीं देखी जाती

अख़्तर सईद ख़ान

दिल की राहें ढूँडने जब हम चले

अख़्तर सईद ख़ान

दीदनी है ज़ख़्म-ए-दिल और आप से पर्दा भी क्या

अख़्तर सईद ख़ान

आज भी दश्त-ए-बला में नहर पर पहरा रहा

अख़्तर सईद ख़ान

एक कहानी

अख़्तर रज़ा सलीमी

तुम्हारे होने का शायद सुराग़ पाने लगे

अख़्तर रज़ा सलीमी

फ़ुरात-ए-चश्म में इक आग सी लगाता हुआ

अख़्तर रज़ा सलीमी

अंदेशे मुझे निगल रहे हैं

अख़्तर रज़ा सलीमी

तजस्सुस

अख़्तर राही

सन्नाटा

अख़्तर राही

घोर अँधेरा

अख़्तर राही