Sad Poetry (page 291)
दिल में टीसें जाग उठती हैं पहलू बदलते वक़्त बहुत
अख्तर लख़नवी
देखो उस ने क़दम क़दम पर साथ दिया बेगाने का
अख्तर लख़नवी
अब दर्द का सूरज कभी ढलता ही नहीं है
अख्तर लख़नवी
अब भी आती है तिरी याद प इस कर्ब के साथ
अख़तर इमाम रिज़वी
वो ख़ुद तो मर ही गया था मुझे भी मार गया
अख़तर इमाम रिज़वी
जुर्म-ए-हस्ती की सज़ा क्यूँ नहीं देते मुझ को
अख़तर इमाम रिज़वी
जो संग हो के मुलाएम है सादगी की तरह
अख़तर इमाम रिज़वी
हर बुत यहाँ टूटे हुए पत्थर की तरह है
अख़तर इमाम रिज़वी
दिल वो प्यासा है कि दरिया का तमाशा देखे
अख़तर इमाम रिज़वी
चाँदनी के हाथ भी जब हो गए शल रात को
अख़तर इमाम रिज़वी
अश्क जब दीदा-ए-तर से निकला
अख़तर इमाम रिज़वी
अपना दुख अपना है प्यारे ग़ैर को क्यूँ उलझाओगे
अख़तर इमाम रिज़वी
शाख़-ए-तन्हाई से फिर निकली बहार-ए-फ़स्ल-ए-ज़ात
अख़्तर हुसैन जाफ़री
तेरा पार उतरना कैसा
अख़्तर हुसैन जाफ़री
तर्क-ए-वादा कि तर्क-ए-ख़्वाब था वो
अख़्तर हुसैन जाफ़री
रेत सहरा नहीं
अख़्तर हुसैन जाफ़री
नज़्म
अख़्तर हुसैन जाफ़री
मक़्तल की बाज़दीद
अख़्तर हुसैन जाफ़री
मैं ग़ैर-महफ़ूज़ रात से डरता हूँ
अख़्तर हुसैन जाफ़री
इक इनआ'म के कितने नाम हैं
अख़्तर हुसैन जाफ़री
सब ख़याल उस के लिए हैं सब सवाल उस के लिए
अख़्तर हुसैन जाफ़री
हिज्र इक हुस्न है इस हुस्न में रहना अच्छा
अख़्तर हुसैन जाफ़री
वो ज़िंदगी है उस को ख़फ़ा क्या करे कोई
अख़्तर होशियारपुरी
वो जो दीवार-ए-आश्नाई थी
अख़्तर होशियारपुरी
तूफ़ान-ए-अब्र-ओ-बाद से हर-सू नमी भी है
अख़्तर होशियारपुरी
तिलिस्म-ए-गुम्बद-ए-बे-दर किसी पे वा न हुआ
अख़्तर होशियारपुरी
थी तितलियों के तआ'क़ुब में ज़िंदगी मेरी
अख़्तर होशियारपुरी
था एक साया सा पीछे पीछे जो मुड़ के देखा तो कुछ नहीं था
अख़्तर होशियारपुरी
शायान-ए-ज़िंदगी न थे हम मो'तबर न थे
अख़्तर होशियारपुरी
शाम तन्हाई धुआँ उठता बराबर देखते
अख़्तर होशियारपुरी