Sad Poetry (page 292)
शाख़ों पे ज़ख़्म हैं कि शगूफ़े खिले हुए
अख़्तर होशियारपुरी
रुख़्सत-ए-रक़्स भी है पाँव में ज़ंजीर भी है
अख़्तर होशियारपुरी
क़र्या-ए-जाँ से गुज़र कर हम ने ये देखा भी है
अख़्तर होशियारपुरी
पहले तो सोच के दोज़ख़ में जलाता है मुझे
अख़्तर होशियारपुरी
न जब कोई शरीक-ए-ज़ात होगा
अख़्तर होशियारपुरी
मिरी निगाह का पैग़ाम बे-सदा जो हुआ
अख़्तर होशियारपुरी
मिरी निगाह का पैग़ाम बे-सदा जो हुआ
अख़्तर होशियारपुरी
मैं ने यूँ देखा उसे जैसे कभी देखा न था
अख़्तर होशियारपुरी
मैं हर्फ़ देखूँ कि रौशनी का निसाब देखूँ
अख़्तर होशियारपुरी
किसे ख़बर जब मैं शहर-ए-जाँ से गुज़र रहा था
अख़्तर होशियारपुरी
ख़्वाहिशें इतनी बढ़ीं इंसान आधा रह गया
अख़्तर होशियारपुरी
हम अक्सर तीरगी में अपने पीछे छुप गए हैं
अख़्तर होशियारपुरी
होंटों पे क़र्ज़-ए-हर्फ़-ए-वफ़ा उम्र भर रहा
अख़्तर होशियारपुरी
एक हम ही तो नहीं आबला-पा आवारा
अख़्तर होशियारपुरी
दिल में इक जज़्बा-ए-बेदाद-ओ-जफ़ा ही होगा
अख़्तर होशियारपुरी
दश्त-दर-दश्त अक्स-ए-दर है यहाँ
अख़्तर होशियारपुरी
दर्द की दौलत-ए-नायाब को रुस्वा न करो
अख़्तर होशियारपुरी
बारहा ठिठका हूँ ख़ुद भी अपना साया देख कर
अख़्तर होशियारपुरी
बजा कि दुश्मन-ए-जाँ शहर-ए-जाँ के बाहर है
अख़्तर होशियारपुरी
अपने क़दमों ही की आवाज़ से चौंका होता
अख़्तर होशियारपुरी
जिस ने दुनिया भर के ग़म अपनाए थे
अख़्तर फ़िरोज़
नफ़रतों से चेहरा चेहरा गर्द था
अख़्तर फ़िरोज़
यूँ ख़ुद को ख़्वाहिशात के अक्सर दिखाए रंग
अख़तर बस्तवी
चुप रहो तो पूछता है ख़ैर है
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
ज़ुल्म सहते रहे शुक्र करते रहे आई लब तक न ये दास्ताँ आज तक
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
ज़िंदगी होगी मिरी ऐ ग़म-ए-दौराँ इक रोज़
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
ज़बान बंद रही दिल का मुद्दआ' न कहा
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
यारों के इख़्लास से पहले दिल का मिरे ये हाल न था
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
शराब आए तो कैफ़-ओ-असर की बात करो
अख़्तर अंसारी अकबराबादी
सहारा दे नहीं सकते शिकस्ता पाँव को
अख़्तर अंसारी अकबराबादी