Sad Poetry (page 293)

रहने दे ये तंज़ के नश्तर अहल-ए-जुनूँ बेबाक नहीं

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

नज़र से सफ़्हा-ए-आलम पे ख़ूनीं दास्ताँ लिखिए

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

नहीं आसान तर्क-ए-इश्क़ करना दिल से ग़म जाना

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

ना जाने क़ाफ़िले पोशीदा किस ग़ुबार में हैं

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

लुटाओ जान तो बनती है बात किस ने कहा

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

कोशिश-ए-पैहम को सई-ए-राएगाँ कहते रहो

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

कौन सुनता है सिर्फ़ ज़ात की बात

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

कैफ़ियत क्या थी यहाँ आलम-ए-ग़म से पहले

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

फ़सुर्दा हो के मयख़ाने से निकले

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

दूर तक रौशनी है ग़ौर से देख

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

याद-ए-माज़ी अज़ाब है या-रब

अख़्तर अंसारी

शबाब-ए-दर्द मिरी ज़िंदगी की सुब्ह सही

अख़्तर अंसारी

दूसरों का दर्द 'अख़्तर' मेरे दिल का दर्द है

अख़्तर अंसारी

अपनी उजड़ी हुई दुनिया की कहानी हूँ मैं

अख़्तर अंसारी

ऐ सोज़-ए-जाँ-गुदाज़ अभी मैं जवान हूँ

अख़्तर अंसारी

आरज़ू को रूह में ग़म बन के रहना आ गया

अख़्तर अंसारी

ये सनम रिवायत-ओ-नक़्ल के हुबल-ओ-मनात से कम नहीं

अख़्तर अंसारी

ये हसीन फ़ितरत के हुस्न का अनीला-पन

अख़्तर अंसारी

तिरा आसमाँ नावकों का ख़ज़ीना हयात-आफ़रीना हयात-आफ़रीना

अख़्तर अंसारी

सुनने वाले फ़साना तेरा है

अख़्तर अंसारी

सुना के अपने ऐश-ए-ताम की रूदाद के टुकड़े

अख़्तर अंसारी

सीना ख़ूँ से भरा हुआ मेरा

अख़्तर अंसारी

शोले भड़काओ देखते क्या हो

अख़्तर अंसारी

शोले भड़काओ देखते क्या हो

अख़्तर अंसारी

सरशार हूँ छलकते हुए जाम की क़सम

अख़्तर अंसारी

समझता हूँ मैं सब कुछ सिर्फ़ समझाना नहीं आता

अख़्तर अंसारी

साफ़ ज़ाहिर है निगाहों से कि हम मरते हैं

अख़्तर अंसारी

सदा कुछ ऐसी मिरे गोश-ए-दिल में आती है

अख़्तर अंसारी

पुर-कैफ़ ज़ियाएँ होती हैं पुर-नूर उजाले होते हैं

अख़्तर अंसारी

फूल सूँघे जाने क्या याद आ गया

अख़्तर अंसारी