Sad Poetry (page 295)
जुस्तुजू ने तिरी हर चंद थका रक्खा है
अख़लाक़ बन्दवी
इधर चराग़ जल गए उधर चराग़ जल गए
अख़लाक़ बन्दवी
फ़ौजियों के सर तो दुश्मन के सिपाही ले गए
अख़लाक़ बन्दवी
फ़लक से चाँद चमन से गुलाब ले आए
अख़लाक़ बन्दवी
चर्ख़ भी छू लें तो जाना है इसी मिट्टी में
अख़लाक़ बन्दवी
अश्क आँखों में भरे बैठे हो
अख़लाक़ बन्दवी
अभी अश्कों में ख़ूँ शामिल नहीं है
अख़लाक़ बन्दवी
शब-ए-ज़ुल्मत
अख़लाक़ अहमद आहन
रू-ब-रू-ए-मर्ग
अख़लाक़ अहमद आहन
महबूबा और मौत
अख़लाक़ अहमद आहन
ये ग़ाज़ा है काजल है उबटन है क्या है
अख़लाक़ अहमद आहन
में महफ़िल-ए-हयात में हैरान सा रहा
अख़लाक़ अहमद आहन
जला के दिल को रखा सुब्ह-ओ-शाम रोज़-ओ-शब
अख़लाक़ अहमद आहन
लफ़्ज़ों के सितम लहजों के आज़ार बहुत हैं
अख़लाक़ आतिफ़
वह शक्ल वह शनाख़्त वह पैकर की आरज़ू
अखिलेश तिवारी
उड़ा के फिर वही गर्द-ओ-ग़ुबार पहले सा
अखिलेश तिवारी
किसे जाना कहाँ है मुनहसिर होता है इस पर भी
अखिलेश तिवारी
काग़ज़ प हर्फ़ हर्फ़ निखर जाना चाहिए
अखिलेश तिवारी
हँसना रोना पाना खोना मरना जीना पानी पर
अखिलेश तिवारी
गुत्थी न सुलझ पाई गो सुलझाई बहुत है
अखिलेश तिवारी
वो हज़ार हम पे जफ़ा सही कोई शिकवा फिर भी रवा नहीं
अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी
ख़ुद नज़ारों पे नज़ारों को हँसी आती है
अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी
जुनून-ए-इश्क़ का जो कुछ हुआ अंजाम क्या कहिए
अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी
इतना भी नहीं करते इंकार चले आओ
अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी
हंगामा-ए-आफ़ात इधर भी है उधर भी
अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी
बेदाद-ए-तग़ाफ़ुल से तो बढ़ता नहीं ग़म और
अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी
जिस के बग़ैर जी नहीं सकते थे जा चुका
अकबर मासूम
है मुसीबत में गिरफ़्तार मुसीबत मेरी
अकबर मासूम
ऐसा एक मक़ाम हो जिस में दिल जैसी वीरानी हो
अकबर मासूम
अब तुझे मेरा नाम याद नहीं
अकबर मासूम