Sad Poetry (page 296)
ये सारे फूल ये पत्थर उसी से मिलते हैं
अकबर मासूम
सुन! हिज्र और विसाल का जादू कहाँ गया
अकबर मासूम
नींद में गुनगुना रहा हूँ मैं
अकबर मासूम
ख़्वाब आराम नहीं ख़्वाब परेशानी है
अकबर मासूम
ख़ुद से निकलूँ भी तो रस्ता नहीं आसान मिरा
अकबर मासूम
ऐसा एक मक़ाम हो जिस में दिल जैसी वीरानी हो
अकबर मासूम
अब भी अक्सर ध्यान तुम्हारा आता है
अकबर मासूम
मिरी शिकस्त भी थी मेरी ज़ात से मंसूब
अकबर हैदराबादी
लबों पर तबस्सुम तो आँखों में आँसू थी धूप एक पल में तो इक पल में बारिश
अकबर हैदराबादी
हर दुकाँ अपनी जगह हैरत-ए-नज़्ज़ारा है
अकबर हैदराबादी
दिल दबा जाता है कितना आज ग़म के बार से
अकबर हैदराबादी
वारिस
अकबर हैदराबादी
नए ख़ौफ़ का आज़ार
अकबर हैदराबादी
ख़ालिक़ और तख़्लीक़
अकबर हैदराबादी
हिसार-अंदर-हिसार
अकबर हैदराबादी
हर्फ़-ए-यक़ीं
अकबर हैदराबादी
दश्त-ए-अदम का सन्नाटा
अकबर हैदराबादी
ये कौन मेरी तिश्नगी बढ़ा बढ़ा के चल दिया
अकबर हैदराबादी
सितम-ज़दा कई बशर क़दम क़दम पे थे
अकबर हैदराबादी
निगह-ए-शौक़ से हुस्न-ए-गुल-ओ-गुलज़ार तो देख
अकबर हैदराबादी
कुल आलम-ए-वुजूद कि इक दश्त-ए-नूर था
अकबर हैदराबादी
जिन पे अजल तारी थी उन को ज़िंदा करता है
अकबर हैदराबादी
जिन के नसीब में आब-ओ-दाना कम कम होता है
अकबर हैदराबादी
घुटन अज़ाब-ए-बदन की न मेरी जान में ला
अकबर हैदराबादी
दूर तक बस इक धुँदलका गर्द-ए-तन्हाई का था
अकबर हैदराबादी
दिल दबा जाता है कितना आज ग़म के बार से
अकबर हैदराबादी
बस इक तसलसुल-ए-तकरार-ए-क़ुर्ब-ओ-दूरी था
अकबर हैदराबादी
बदन से रिश्ता-ए-जाँ मो'तबर न था मेरा
अकबर हैदराबादी
आँख में आँसू का और दिल में लहू का काल है
अकबर हैदराबादी
दिल है न निशान बे-दिली का
अकबर हुसैन मोहानी इबरत