Sad Poetry (page 298)
न बहते अश्क तो तासीर में सिवा होते
अकबर इलाहाबादी
मेरे हवास-ए-इश्क़ में क्या कम हैं मुंतशिर
अकबर इलाहाबादी
लुत्फ़ चाहो इक बुत-ए-नौ-ख़ेज़ को राज़ी करो
अकबर इलाहाबादी
क्या जानिए सय्यद थे हक़ आगाह कहाँ तक
अकबर इलाहाबादी
क्या ही रह रह के तबीअ'त मिरी घबराती है
अकबर इलाहाबादी
ख़ुशी क्या हो जो मेरी बात वो बुत मान जाता है
अकबर इलाहाबादी
ख़ुशी है सब को कि ऑपरेशन में ख़ूब निश्तर ये चल रहा है
अकबर इलाहाबादी
ख़ुदा अलीगढ़ की मदरसे को तमाम अमराज़ से शिफ़ा दे
अकबर इलाहाबादी
जो तुम्हारे लब-ए-जाँ-बख़्श का शैदा होगा
अकबर इलाहाबादी
जज़्बा-ए-दिल ने मिरे तासीर दिखलाई तो है
अकबर इलाहाबादी
जल्वा अयाँ है क़ुदरत-ए-परवरदिगार का
अकबर इलाहाबादी
जब यास हुई तो आहों ने सीने से निकलना छोड़ दिया
अकबर इलाहाबादी
हूँ मैं परवाना मगर शम्अ तो हो रात तो हो
अकबर इलाहाबादी
हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना
अकबर इलाहाबादी
हर क़दम कहता है तू आया है जाने के लिए
अकबर इलाहाबादी
हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है
अकबर इलाहाबादी
हल्क़े नहीं हैं ज़ुल्फ़ के हल्क़े हैं जाल के
अकबर इलाहाबादी
ग़म्ज़ा नहीं होता कि इशारा नहीं होता
अकबर इलाहाबादी
फ़लसफ़ी को बहस के अंदर ख़ुदा मिलता नहीं
अकबर इलाहाबादी
इक बोसा दीजिए मिरा ईमान लीजिए
अकबर इलाहाबादी
दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ
अकबर इलाहाबादी
दिल-ए-मायूस में वो शोरिशें बरपा नहीं होतीं
अकबर इलाहाबादी
दिल हो ख़राब दीन पे जो कुछ असर पड़े
अकबर इलाहाबादी
दश्त-ए-ग़ुर्बत है अलालत भी है तन्हाई भी
अकबर इलाहाबादी
दर्द तो मौजूद है दिल में दवा हो या न हो
अकबर इलाहाबादी
चर्ख़ से कुछ उमीद थी ही नहीं
अकबर इलाहाबादी
बे-तकल्लुफ़ बोसा-ए-ज़ुल्फ़-ए-चलीपा लीजिए
अकबर इलाहाबादी
अपने पहलू से वो ग़ैरों को उठा ही न सके
अकबर इलाहाबादी
आँखें मुझे तलवों से वो मलने नहीं देते
अकबर इलाहाबादी
आज आराइ-ए-शगेसू-ए-दोता होती है
अकबर इलाहाबादी