Sad Poetry (page 290)

शनासाई

अख़्तर पयामी

लम्स-ए-आख़िरी

अख़्तर पयामी

ख़त-ए-राह-गुज़ार

अख़्तर पयामी

घरौंदे

अख़्तर पयामी

आवारा

अख़्तर पयामी

नश्तर से आरज़ू के दिल-ए-ज़िंदगी फ़िगार

अख़्तर ओरेनवी

मक़ाम-ए-दिल बहुत ऊँचा बना है

अख़्तर ओरेनवी

जो भी मिल जाता है घर-बार को दे देता हूँ

अख़्तर नज़्मी

थीं तुम्हारी जिस पे नवाज़िशें कभी तुम भी जिस पे थे मेहरबाँ

अख़तर मुस्लिमी

सुन के रूदाद-ए-अलम मेरी वो हँस कर बोले

अख़तर मुस्लिमी

मेरे किरदार में मुज़्मर है तुम्हारा किरदार

अख़तर मुस्लिमी

मिरे दिल पे हाथ रख कर मुझे देने वाले तस्कीं

अख़तर मुस्लिमी

लज़्ज़त-ए-दर्द मिली जुर्म-ए-मोहब्बत में उसे

अख़तर मुस्लिमी

ख़ुशी ही शर्त नहीं लुत्फ़-ए-ज़िंदगी के लिए

अख़तर मुस्लिमी

हर शाख़-ए-चमन है अफ़्सुर्दा हर फूल का चेहरा पज़मुर्दा

अख़तर मुस्लिमी

हाँ ये भी तरीक़ा अच्छा है तुम ख़्वाब में मिलते हो मुझ से

अख़तर मुस्लिमी

फ़रेब-ख़ुर्दा है इतना कि मेरे दिल को अभी

अख़तर मुस्लिमी

अजीब उलझन में तू ने डाला मुझे भी ऐ गर्दिश-ए-ज़माना

अख़तर मुस्लिमी

तुम अपनी ज़बाँ ख़ाली कर के ऐ नुक्ता-वरो पछताओगे

अख़तर मुस्लिमी

शिकवा इस का तो नहीं है जो करम छोड़ दिया

अख़तर मुस्लिमी

नाले मिरे जब तक मिरे काम आते रहेंगे

अख़तर मुस्लिमी

न समझ सकी जो दुनिया ये ज़बान-ए-बे-ज़बानी

अख़तर मुस्लिमी

माइल-ए-लुत्फ़ है आमादा-ए-बे-दाद भी है

अख़तर मुस्लिमी

किस को कहते हैं जफ़ा क्या है वफ़ा याद नहीं

अख़तर मुस्लिमी

कहाँ जाएँ छोड़ के हम उसे कोई और उस के सिवा भी है

अख़तर मुस्लिमी

दिल ही रह-ए-तलब में न खोना पड़ा मुझे

अख़तर मुस्लिमी

दरिया नज़र न आए न सहरा दिखाई दे

अख़तर मुस्लिमी

आँसुओं के तूफ़ाँ में बिजलियाँ दबी रखना

अख़तर मुस्लिमी

सू-ए-मक़्तल कोई दम साथ चले

अख्तर लख़नवी

होश्यार कर रहा है गजर जागते रहो

अख्तर लख़नवी