Sad Poetry (page 364)

मुझे उन से मोहब्बत हो गई है

अातिश बहावलपुरी

लाख पर्दों में गो निहाँ हम थे

अातिश बहावलपुरी

कमाल-ए-हुस्न का जिस से तुम्हें ख़ज़ाना मिला

अातिश बहावलपुरी

इब्तिदा बिगड़ी इंतिहा बिगड़ी

अातिश बहावलपुरी

हर्फ़-ए-शिकवा न लब पे लाओ तुम

अातिश बहावलपुरी

आप की हस्ती में ही मस्तूर हो जाता हूँ मैं

अातिश बहावलपुरी

किस के बदन की नर्मियाँ हाथों को गुदगुदा गईं

आतिफ़ वहीद 'यासिर'

तिरी दोस्ती का कमाल था मुझे ख़ौफ़ था न मलाल था

आतिफ़ वहीद 'यासिर'

रहज़नों के हाथ सारा इंतिज़ाम आया तो क्या

आतिफ़ वहीद 'यासिर'

आँखों को नक़्श-ए-पा तिरा दिल को ग़ुबार कर दिया

आतिफ़ वहीद 'यासिर'

फिर किसी हादसे का दर खोले

अस्नाथ कंवल

काग़ज़ क़लम दवात के अंदर रुक जाता है

अस्नाथ कंवल

बर्क़ बाराँ तीरगी और ज़लज़ला

आसिम शहनवाज़ शिबली

तुम्हारी याद का साया न होगा

आसिम शहनवाज़ शिबली

जहाँ अपना क़िस्सा सुनाना पड़ा

आसी उल्दनी

बेताब सा फिरता है कई रोज़ से 'आसी'

आसी उल्दनी

अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं है मुझ को

आसी उल्दनी

क़ैद से पहले भी आज़ादी मिरी ख़तरे में थी

आसी उल्दनी

क़ैद से पहले भी आज़ादी मिरी ख़तरे में थी

आसी उल्दनी

हज़ारों तरह अपना दर्द हम उस को सुनाते हैं

आसी उल्दनी

हज़ारों तरह अपना दर्द हम इस को सुनाते हैं

आसी उल्दनी

नसरी नज़्म

आसी रिज़वी

तुझे हम याद हर-दम ऐ सितम ईजाद करते हैं

आसी रामनगरी

सरशार हूँ साक़ी की आँखों के तसव्वुर से

आसी रामनगरी

सर झुकाए सर-ए-महशर जो गुनहगार आए

आसी रामनगरी

क़फ़स-नसीबों का उफ़ हाल-ए-ज़ार क्या होगा

आसी रामनगरी

मंज़िल पे ले के पहुँचेगा अज़्म-ए-जवाँ मुझे

आसी रामनगरी

मानूस हो गए हैं ग़म-ए-ज़िंदगी से हम

आसी रामनगरी

क्या मसर्रत है पूछिए हम से

आसी रामनगरी

हैं अहल-ए-चमन हैराँ ये कैसी बहार आई

आसी रामनगरी