Sad Poetry (page 362)

आँख पे पट्टी बाँध के मुझ को तन्हा छोड़ दिया है

अब्बास ताबिश

तमाम उम्र की बे-ताबियों का हासिल था

अब्बास रिज़वी

मैं जो चुप था हमा-तन-गोश थी बस्ती सारी

अब्बास रिज़वी

ख़ौफ़ ऐसा है कि दुनिया के सताए हुए लोग

अब्बास रिज़वी

मैं उस से दूर रहा उस की दस्तरस में रहा

अब्बास रिज़वी

जिस को हम समझते थे उम्र भर का रिश्ता है

अब्बास रिज़वी

जब कोई तीर हवादिस की कमाँ से आया

अब्बास रिज़वी

हम तिरे हुस्न-ए-जहाँ-ताब से डर जाते हैं

अब्बास रिज़वी

हर तरफ़ शोर-ए-फ़ुग़ाँ है कोई सुनता ही नहीं

अब्बास रिज़वी

गुज़र गया वो ज़माना वो ज़ख़्म भर भी गए

अब्बास रिज़वी

धुआँ सा फैल गया दिल में शाम ढलते ही

अब्बास रिज़वी

अहल-ए-जुनूँ थे फ़स्ल-ए-बहाराँ के सर गए

अब्बास रिज़वी

लम्हा-दर-लम्हा तिरी राह तका करती है

अब्बास क़मर

हम ऐसे सर-फिरे दुनिया को कब दरकार होते हैं

अब्बास क़मर

हालत-ए-हाल से बेगाना बना रक्खा है

अब्बास क़मर

अश्कों को आरज़ू-ए-रिहाई है रोइए

अब्बास क़मर

फिर वही अंदोह-ए-जाँ है और मैं

अब्बास कैफ़ी

उस से पूछो अज़ाब रस्तों का

अब्बास दाना

ये बात सच है कि तेरा मकान ऊँचा है

अब्बास दाना

वही दर्द है वही बेबसी तिरे गाँव में मिरे शहर में

अब्बास दाना

वफ़ादारी पे दे दी जान ग़द्दारी नहीं आई

अब्बास दाना

उस की वफ़ा न मेरी वफ़ा का सवाल था

अब्बास दाना

नाम ख़ुश्बू था सरापा भी ग़ज़ल जैसा था

अब्बास दाना

मौत ने मुस्कुरा के पूछा है

अब्बास दाना

कोई सुबूत-ए-जुर्म जगह पर नहीं मिला

अब्बास दाना

जो हैं मज़लूम उन को तो तड़पता छोड़ देते हैं

अब्बास दाना

दिल लगाया है तो नफ़रत भी नहीं कर सकते

अब्बास दाना

अपने ही ख़ून से इस तरह अदावत मत कर

अब्बास दाना

ज़मीन उन के लिए फूल खिलाती है

अब्बास अतहर

जो सारे हम-सफ़र इक बार हिर्ज़-ए-जाँ कर लें

अब्बास अलवी